मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में वर्ष 2024 से 2026 के बीच जन्म प्रमाणपत्रों में किए गए 19,734 संशोधनों को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम जन्म प्रमाणपत्रों में कथित अनियमितताओं, फर्जीवाड़े और नियमों के उल्लंघन की आशंकाओं को देखते हुए उठाया गया है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में जन्म प्रमाणपत्रों में नाम, जन्म तिथि, माता-पिता की जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों में संशोधन किए गए थे। इनमें से कई मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, जिससे दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
महाराष्ट्र सरकार ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे सभी संशोधनों की समीक्षा करने और नियमों के अनुरूप न पाए जाने वाले बदलावों को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का दुरुपयोग न हो और नागरिक अभिलेखों की प्रामाणिकता बनी रहे।
अधिकारियों का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र पहचान, शिक्षा, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए एक अहम दस्तावेज है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने वैध कारणों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन करवाए हैं, उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा आवेदन करने का अवसर दिया जा सकता है। वहीं संदिग्ध मामलों की विस्तृत जांच भी जारी रहेगी।
इस फैसले के बाद प्रभावित नागरिकों को अपने दस्तावेजों की स्थिति की जांच करने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिक रिकॉर्ड प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना है।

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