अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को मिले शुरुआती संकेतों के अनुसार, चंदे की राशि में गड़बड़ी का यह सिलसिला मार्च 2025 से चल रहा था। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय तक मामला या तो पकड़ में नहीं आया या फिर उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
जांच के दौरान मंदिर परिसर के CCTV फुटेज, कैश काउंटिंग से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गबन में कौन-कौन लोग शामिल थे और धनराशि को किस तरह से इधर-उधर किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, दान पेटियों से निकाली गई राशि और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच अंतर पाए जाने के बाद मामला सामने आया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और संबंधित कर्मचारियों तथा पूर्व कर्मियों से पूछताछ शुरू की गई। कुछ संदिग्धों के वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में एक पूर्व कर्मचारी के पास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसके बाद जांच एजेंसियां उसकी आय और संपत्ति के स्रोतों की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, मंदिर ट्रस्ट ने साफ किया है कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच कराई जा रही है।
उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) और पुलिस की टीमें लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गबन की वास्तविक राशि कितनी है और इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल, CCTV फुटेज और वित्तीय रिकॉर्ड को जांच का सबसे अहम आधार माना जा रहा है।

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