वॉशिंगटन/जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक शांति समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच टकराव समाप्त करना, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाना और आगे की वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त करना है।
समझौते के तहत ईरान को आर्थिक राहत देने, तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने और चरणबद्ध तरीके से जमी हुई (फ्रोजन) ईरानी संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने का प्रावधान शामिल है। हालांकि इन परिसंपत्तियों की रिहाई समझौते की शर्तों के पालन और आगे की वार्ताओं की प्रगति से जुड़ी बताई गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर कहा कि ये धनराशि मूल रूप से ईरान की है और अमेरिका उसका मालिक नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका सीधे तौर पर ईरान को कोई नया वित्तीय अनुदान नहीं दे रहा, बल्कि समझौते के तहत कुछ जमी हुई संपत्तियों और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर समाधान तलाशा जा रहा है।
समझौते में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला रखने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की बातचीत जारी रखने पर भी सहमति बनी है।
हालांकि इस समझौते को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि ईरान को आर्थिक रियायतें देने से पहले उसकी प्रतिबद्धताओं का पूर्ण सत्यापन होना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा कदम है।
शांति समझौते के बाद अब दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक विस्तृत वार्ताओं का दौर चलेगा, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

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