ग्वालियर। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) भर्ती प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। बायोमैट्रिक सत्यापन के दौरान पहचान में गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने एक ऐसे साल्वर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके तार मध्य प्रदेश के जबलपुर समेत कई शहरों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह दूसरे व्यक्तियों को बैठाकर परीक्षा दिलाने की साजिश रची गई थी। भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण में बायोमैट्रिक मिलान के दौरान पहचान में अंतर सामने आया, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ।
मामले की प्रारंभिक जांच के बाद बीएसएफ अधिकारियों ने बेंगलुरु में जीरो पर एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद केस डायरी मध्य प्रदेश पुलिस को भेजी गई, जिसके आधार पर ग्वालियर जिले के बिजौली थाना क्षेत्र में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि परीक्षा में बैठने वाले साल्वर किन लोगों के संपर्क में थे, उन्हें किसने नियुक्त किया और इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। पुलिस को आशंका है कि यह कोई संगठित गिरोह हो सकता है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाकर अवैध कमाई करता था।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में जबलपुर कनेक्शन सामने आने के बाद वहां के कुछ संदिग्धों की गतिविधियों और संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस डिजिटल साक्ष्य, बायोमैट्रिक रिकॉर्ड और परीक्षा दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
भर्ती परीक्षाओं में बढ़ते फर्जीवाड़े को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब बायोमैट्रिक सत्यापन और डिजिटल निगरानी को और मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जांच के दायरे में आने वाले सभी लोगों से पूछताछ की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग शामिल हैं।

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