लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरेखण की चर्चाएं तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर भी टूट की अटकलें सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि सपा के 25 से 27 सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और अलग राह चुन सकते हैं।
हालांकि, ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक अफवाह करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सपा पूरी तरह एकजुट है और विपक्षी दल जानबूझकर भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से चल रही चर्चाओं में कहा जा रहा है कि कुछ सांसदों की नाराजगी को लेकर लगातार राजनीतिक संपर्क बनाए जा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने या असंतोष जताने की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
सपा ने पलटवार करते हुए कहा कि जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं। पार्टी का कहना है कि सांसदों और संगठन के बीच नियमित संवाद चल रहा है तथा किसी प्रकार के विभाजन का सवाल ही नहीं उठता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच विभिन्न दलों में टूट-फूट की अटकलें लगना असामान्य नहीं है। लेकिन जब तक कोई सांसद या विधायक आधिकारिक रूप से अपना रुख स्पष्ट नहीं करता, तब तक ऐसे दावों को राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल सपा नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि राजनीतिक विरोधी दल इन चर्चाओं को हवा देने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यदि कोई ठोस घटनाक्रम सामने आता है तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

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