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हिमाचल में तीसरे मोर्चे की फिर दस्तक, क्या 2027 में बदलेगा सियासी इतिहास?Third Front knocks again in Himachal, will political history change in 2027?

 


बीजेपी के बागी राम लाल मार्कंडा नई पार्टी बनाने की तैयारी में, लेकिन राज्य में तीसरे मोर्चे का रिकॉर्ड रहा है कमजोर

शिमला। हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे राजनीतिक मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीजेपी के पूर्व मंत्री राम लाल मार्कंडा ने दावा किया है कि कांग्रेस और बीजेपी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे नेताओं को साथ लेकर नई राजनीतिक पार्टी बनाई जा सकती है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनावों के बाद इस दिशा में प्रयास तेज किए जाएंगे। 

हालांकि, हिमाचल की राजनीति का इतिहास बताता है कि तीसरे मोर्चे के अधिकांश प्रयोग लंबे समय तक टिक नहीं पाए। 1970 के दशक से लेकर 2012 तक कई क्षेत्रीय दल और मोर्चे बने, लेकिन राज्य की राजनीति पर कांग्रेस और बीजेपी का ही वर्चस्व बना रहा। 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस ने कुछ समय के लिए प्रभाव जरूर दिखाया, लेकिन बाद में उसका अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके बाद बने अन्य क्षेत्रीय दल भी स्थायी विकल्प नहीं बन सके। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मार्कंडा असंतुष्ट नेताओं को एक मंच पर लाने और मजबूत संगठन खड़ा करने में सफल होते हैं तो 2027 के चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। हालांकि, राज्य की दो-दलीय राजनीतिक परंपरा को देखते हुए नई पार्टी के सामने जनाधार और संगठन खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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