संघ प्रमुख बोले- मौजूदा विश्व व्यवस्था अपूर्ण, भारतीय ज्ञान परंपरा और नई शिक्षा नीति से मिलेगा समग्र समाधान
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका समग्र और एकीकृत समाधान भारत के पास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था अपूर्ण है और भारत अपनी ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक दृष्टि तथा जीवन मूल्यों के आधार पर विश्व को नई दिशा दे सकता है।
'भारतीय शिक्षण मंडल' के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारत को केवल अपनी बात दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ रखने की जरूरत है। उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) की सराहना करते हुए कहा कि इसमें भारतीय ज्ञान प्रणालियों को शिक्षा से जोड़ने और देश की विविधता को सम्मान देने का प्रयास किया गया है।
संघ प्रमुख ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार हों। उन्होंने भारतीय चिंतन, परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि भारत यदि अपनी मौलिक पहचान के साथ आगे बढ़े तो वह वैश्विक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने शिक्षा जगत से भारतीय मूल्यों और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का भी आह्वान किया।

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