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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर नया मोड़ सामने आया है। शिवसेना के शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक पत्र में उद्धव गुट के दो सांसदों के हस्ताक्षर नहीं होने की खबर ने सियासी अटकलों को और तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) खेमे की ओर से सांसदों के समर्थन को लेकर जो पत्र भेजा गया था, उसमें दो सांसदों के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पार्टी के भीतर कोई असहमति है या फिर कुछ सांसद अलग राजनीतिक रुख अपनाने की तैयारी में हैं।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री रह चुके के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने दावा किया है कि उनका ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल हो रहा है और कई नेता तथा जनप्रतिनिधि उनके संपर्क में हैं। हालांकि उद्धव ठाकरे खेमे ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी एकजुट है और विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हस्ताक्षरों को लेकर उठे सवालों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इससे विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों को नए राजनीतिक हथियार मिल सकते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हस्ताक्षर नहीं होने के पीछे तकनीकी कारण हैं या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है।
इस बीच दोनों गुट अपने-अपने विधायकों और सांसदों को एकजुट रखने में जुटे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में हुए घटनाक्रमों को देखते हुए हर छोटा घटनाक्रम भी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित सांसद इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और आने वाले दिनों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर कौन-सा नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है।

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