जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहले से ही लंबित मामलों के भारी दबाव से जूझ रहा है। अब आने वाले महीनों में कई वरिष्ठ न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। न्यायपालिका में रिक्त पदों और बढ़ते लंबित मामलों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है। हालात ऐसे हैं कि औसतन एक न्यायाधीश के हिस्से में 14 हजार से अधिक मामलों का बोझ आने की आशंका जताई जा रही है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिक्त पदों को समय पर नहीं भरा गया तो मामलों के निपटारे की रफ्तार और धीमी पड़ सकती है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 53 है, जबकि मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार 42 न्यायाधीश कार्यरत थे और 11 पद रिक्त थे। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की उपलब्ध संख्या और कम होने की आशंका है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि लंबित मामलों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। वर्षों तक फैसले नहीं आने से न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि लोगों का समय, धन और विश्वास भी दांव पर लग जाता है। देशभर में अदालतों में लंबित मामलों की एक बड़ी वजह न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भी माना जाता है।
हालांकि न्यायपालिका और सरकार दोनों स्तरों पर रिक्त पद भरने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन बढ़ते मुकदमों की तुलना में न्यायाधीशों की उपलब्धता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाल के महीनों में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं भी तेज हुई हैं।

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