जम्मू-कश्मीर में होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने यात्रा की सुरक्षा के लिए 670 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है। यह अमरनाथ यात्रा के इतिहास में सबसे बड़ा सुरक्षा प्रबंध माना जा रहा है।
यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से मोर्चा संभालेंगी।
सुरक्षा व्यवस्था की प्रमुख बातें
670 CAPF कंपनियों की तैनाती
संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से 24 घंटे निगरानी
डॉग स्क्वॉड द्वारा एंटी-सबोटाज जांच
बम निरोधक दस्तों की विशेष तैनाती
स्नाइपर टीमों और क्विक रिएक्शन टीमों की मौजूदगी
हाईवे और यात्रा मार्गों पर रोड ओपनिंग पार्टियां (ROP)
हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरों से निगरानी
प्रमुख कैंपों और लंगरों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था
सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा मार्ग, लंगर स्थलों और ठहराव केंद्रों पर ड्रोन सर्विलांस बढ़ाया जाए तथा डॉग स्क्वॉड के माध्यम से लगातार जांच की जाए।
पूरे मार्ग पर रहेगा सुरक्षा घेरा
सुरक्षा बलों की तैनाती लक्ष्मणपुर (लखनपुर) से लेकर पवित्र गुफा तक की जाएगी। पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों, बेस कैंपों, जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग, यात्री निवासों और ट्रांजिट कैंपों को विशेष सुरक्षा कवच में रखा जाएगा।
हाल के वर्षों में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस बार तकनीक आधारित निगरानी को प्राथमिकता दी गई है। ड्रोन, CCTV नेटवर्क, डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक इकाइयों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है।

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