मुंबई।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्वर्ण भंडार की चमक लगातार बढ़ती जा रही है। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी के कारण आरबीआई के गोल्ड रिजर्व का मूल्य बढ़कर लगभग 11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में आरबीआई के स्वर्ण भंडार के मूल्य में करीब 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है। दो वर्ष पहले की तुलना में यह हिस्सा लगभग दोगुना हो चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। भारत भी इसी दिशा में अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत कर रहा है।
वित्तीय जानकारों के अनुसार सोना किसी भी देश के लिए सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। संकट या वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में यह विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान करता है और वित्तीय जोखिम को कम करने में सहायक होता है।
हाल के वर्षों में आरबीआई ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है, जिसका लाभ अब बढ़ती कीमतों के रूप में दिखाई दे रहा है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार की गुणवत्ता और मजबूती दोनों में सुधार हुआ है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें मजबूत बनी रहती हैं तो आने वाले समय में आरबीआई के स्वर्ण भंडार का मूल्य और अधिक बढ़ सकता है। इससे भारत की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना है।

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