वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला उनके निवेश खाते से जुड़ी कथित शेयर ट्रेडिंग गतिविधियों का है। सामने आई जानकारी के अनुसार पिछले तीन महीनों में ट्रंप से जुड़े निवेश खाते से 3,642 बार शेयरों की खरीद-बिक्री की गई। आंकड़ों के मुताबिक यह औसतन हर 35 मिनट में एक ट्रेड के बराबर है, जिसने अमेरिका में राजनीतिक और वित्तीय बहस छेड़ दी है।
विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं ने इस असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि कहीं इसमें संवेदनशील सरकारी सूचनाओं का लाभ तो नहीं लिया गया। कई विपक्षी सांसदों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है और इसे संभावित 'इनसाइडर ट्रेडिंग' से जोड़कर देखा है।
हालांकि Trump Organization ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन का कहना है कि संबंधित निवेश गतिविधियां पेशेवर वित्तीय प्रबंधकों द्वारा संचालित की जाती हैं और राष्ट्रपति ट्रंप का व्यक्तिगत रूप से इन सौदों के संचालन में कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं है। कंपनी के अनुसार सभी निवेश गतिविधियां लागू कानूनों और वित्तीय नियमों के अनुरूप की गई हैं।
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि अमेरिका में राष्ट्रपति और उच्च पदस्थ अधिकारियों के वित्तीय हितों को लेकर पहले से ही पारदर्शिता की मांग उठती रही है। आलोचकों का कहना है कि यदि किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़े खाते में इतनी बड़ी संख्या में लेनदेन हो रहे हैं तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि इन फैसलों के पीछे कौन है और क्या हितों के टकराव की कोई संभावना है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े निवेश फंड और पोर्टफोलियो में एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग या सक्रिय निवेश प्रबंधन के कारण बड़ी संख्या में सौदे होना असामान्य नहीं माना जाता। लेकिन जब मामला देश के राष्ट्रपति से जुड़ा हो तो स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक जांच और राजनीतिक सवाल बढ़ जाते हैं।
व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस मुद्दे पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। वहीं विपक्ष इस मामले को कांग्रेस में उठाने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद अमेरिकी राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब राष्ट्रपति की वित्तीय पारदर्शिता और नैतिक जवाबदेही को लेकर बहस पहले से जारी है।

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