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प्यासी जनता, मालामाल टैंकर माफिया?Thirsty public, rich tanker mafia?

 

इंदौर में बिना नंबर दौड़ रहे सैकड़ों पानी टैंकर, एक ही गाड़ी के कई जगह दर्ज नंबर!

बौद्धिक प्रतिकार | प्रणव बजाज

इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब पानी संकट और टैंकर माफिया के खेल को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर में पानी के नाम पर बड़ा खेल चलने के आरोप सामने आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि नगर निगम की सूची में दर्ज कई टैंकर अलग-अलग स्थानों पर एक ही नंबर से संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, सैकड़ों टैंकर बिना वैध नंबर और दस्तावेजों के शहर में पानी सप्लाई कर रहे हैं।


सूत्रों के अनुसार नगर निगम रिकॉर्ड में दर्ज टैंकरों की संख्या और सड़कों पर दौड़ रहे टैंकरों के आंकड़ों में भारी अंतर दिखाई दे रहा है। आरोप है कि कई कंपनियों और ठेकेदारों ने एक ही नंबर पर कई-कई टैंकर चला रखे हैं। इससे न केवल सरकारी रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि करोड़ों रुपये के भुगतान और टैक्स व्यवस्था पर भी गंभीर संदेह पैदा हो गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है, जबकि दूसरी ओर टैंकर कारोबार से जुड़े लोग मोटी कमाई कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में रोजाना टैंकरों की लंबी लाइनें दिखाई देती हैं, लेकिन पानी वितरण में पारदर्शिता नजर नहीं आती। आरोप यह भी है कि कई टैंकरों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी है और आधे-अधूरे नामों से पूरा कारोबार चल रहा है।


मामले में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि एक ही नंबर कई स्थानों पर दर्ज है, तो आखिर जांच और सत्यापन कैसे किया गया? लोगों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर यह खेल संभव नहीं हो सकता।

शहर में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। महिलाएं और आम नागरिक घंटों पानी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं टैंकर कारोबारियों की चांदी कट रही है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच करेगा या फिर जनता इसी तरह पानी और व्यवस्था दोनों के लिए भटकती रहेगी?

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