सम्पादकीय
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG का प्रश्नपत्र लीक होने की आशंकाओं के बीच रद्द होना केवल एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, बल्कि यह पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गहरा सवाल है। करोड़ों छात्र-छात्राएं वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सपनों के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटनाएं उनके आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन पर सीधा प्रहार करती हैं।
बीते कुछ वर्षों में लगभग हर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा किसी न किसी विवाद, पेपर लीक या धांधली के आरोपों में घिरी नजर आई है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि समस्या किसी एक संस्था या एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरे सिस्टम में गंभीर खामियां मौजूद हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि हर बार जांच, गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई के दावे होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही कहानी दोहराई जाती है।
आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिक्षा और रोजगार से जुड़ी परीक्षाएं माफियाओं के शिकंजे में कैसे पहुंच गईं? यदि देश की सबसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल परीक्षाएं भी सुरक्षित नहीं हैं, तो सामान्य छात्रों का भरोसा किस आधार पर कायम रहेगा? मेहनती और ईमानदार छात्रों के मन में यह डर बैठने लगा है कि केवल परिश्रम ही सफलता की गारंटी नहीं रह गया।
सरकार और परीक्षा एजेंसियों को अब केवल औपचारिक कार्रवाई से आगे बढ़ना होगा। परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा, गोपनीयता और जवाबदेही को पूरी तरह मजबूत करना होगा। पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें, दोषियों की संपत्ति जब्ती और आजीवन प्रतिबंध जैसे कठोर प्रावधान लागू करने होंगे। साथ ही परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट भी जरूरी है।
यह केवल परीक्षा का संकट नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भरोसे का संकट है। यदि समय रहते कठोर और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों का विश्वास व्यवस्था से पूरी तरह खत्म हो सकता है। अब सरकार को यह साबित करना होगा कि देश में मेहनत और ईमानदारी आज भी सबसे बड़ी ताकत है, न कि पेपर लीक

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