इंदौर। प्रस्तावित पूर्वी बायपास का काम अटक सकता है। कोर्ट ने नांदेड से शुरू होकर देवास जिले में शिप्रा के पास पीर कराड़िया तक प्रस्तावित पूर्वी बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। परियोजना को लेकर जारी की गई अधिसूचना को चुनौती देते हुए भारतीय किसान यूनियन (सूर्यवंशी) ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है।
कोर्ट ने केंद्र शासन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और एसडीओ खुडैल को नोटिस जारी किए हैं।एडवोकेट पूर्वा महाजन ने बताया कि देवास से लेकर पीथमपुर के समीप नांदेड के बीच 74 गांवों की 640 हेक्टेयर जमीन पर 77 किमी की छह लेन सड़क प्रस्तावित है।
2100 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए एनएचएआइ ने 23 सितंबर 2025 को अधिसूचना जारी की थी। कोर्ट को बताया कि अधिसूचना में सिर्फ जमीन के खसरा नंबर दिखाए गए हैं। खसरा नंबर के किस भाग की जमीन जाएगी, इसका उल्लेख नहीं है।
खसरा नंबर जारी किए गए
सोमवार को वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागड़िया ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की। कहा कि एनएचएआइ एक्ट की धारा 3-ए में स्पष्ट है कि अधिग्रहित की जाने वाली जमीन की जानकारी स्पष्ट होना चाहिए, लेकिन सिर्फ खसरा नंबर जारी किए गए हैं।
किसी खसरे की जमीन में से कुछ हिस्सा जा रहा है तो यह स्पष्ट नहीं है कि वह हिस्सा कहां है। इस जगह कोई पेड़ है या नहीं यह भी स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के आदेश देते हुए केंद्र शासन और एनएचएआइ से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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