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सवालों के घेरे में पुलिस मुख्यालय की 2.5 करोड़ की सॉफ्टवेयर खरीदी, वित्त विभाग ने दागे तीखे सवाल- किस अधिकार से खरीदा?Police Headquarters' purchase of software worth Rs 2.5 crore under scrutiny, Finance Department raises sharp questions - with what authority was it purchased?



भोपाल। साइबर फॉरेंसिक लैब के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा ढाई करोड़ रुपये से दो अलग-अलग तरह के हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर खरीदी को लेकर वित्त विभाग ने भी कड़ी आपत्ति की है। विभाग ने गृह विभाग से चार बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इसमें पहला यह कि वित्तीय अधिकार नियम 1995 के अंतर्गत डीजीपी को सॉफ्टवेयर खरीदी के अधिकार नहीं हैं। फिर किस नियम के अंतर्गत खरीदी की गई उसका विवरण दें।

दूसरा यह कि जब डीजीपी को अधिकार नहीं हैं तो क्या गृह विभाग से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति ली गई है। तीसरा, किस बजट शीर्ष से सॉफ्टवेयर खरीदा गया है। चौथा यह कि सॉफ्टवेयर की खरीदी एक तकनीकी विषय है। क्या पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए तकनीकी समिति का गठन किया था।

साथ ही गृह विभाग ने भी पुलिस मुख्यालय से खरीदी के अधिकार के संबंध में जानकारी मांगी है। साइबर फॉरेंसिक जांच के लिए आठ नग सेलेब्राइट इनसाइट ऑनलाइन प्रो सॉफ्टवेयर और एक नग सेलेब्राइट प्रीमियम सॉफ्टवेयर (मोबाइल फोन फॉरेंसिक के लिए) की खरीदी की गई है, जिस पर गृह और वित्त विभाग को आपत्ति है।


हालांकि, पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि खरीदी नियमानुसार की गई है। भ्रम की स्थिति हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को लेकर है, जिसे स्पष्ट करते हुए गृह विभाग को जानकारी भेज दी गई है। अभी इसमें भुगतान भी कंपनी को नहीं किया गया है।

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