नई दिल्ली। भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। Indian Space Research Organisation यानी ISRO ने 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने का लक्ष्य तय किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में रूस के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है।
इस स्पेस स्टेशन को भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का विस्तार माना जा रहा है, जो Gaganyaan मिशन के बाद अगला बड़ा चरण होगा। ISRO का उद्देश्य है कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहकर रिसर्च कर सकें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मौजूदगी मजबूत हो।
सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के लिए रूस की अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos के साथ तकनीकी सहयोग पर बातचीत चल रही है। रूस को अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और संचालन का लंबा अनुभव है, जिससे भारत को इस मिशन में मदद मिल सकती है।
इस स्पेस स्टेशन को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसे छोटे मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे बाद में धीरे-धीरे विस्तारित किया जा सकेगा। इसमें वैज्ञानिक प्रयोग, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च और स्पेस टेक्नोलॉजी टेस्टिंग जैसे कई कार्य किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में ला खड़ा करेगी, जिनके पास अपना स्पेस स्टेशन है या इस दिशा में मजबूत क्षमता है। इससे न केवल वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की रणनीतिक ताकत भी बढ़ेगी।
हालांकि इस परियोजना की लागत, तकनीकी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे अभी चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले वर्षों में सरकार और ISRO इस मिशन को लेकर विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे।

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