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सिंधिया समर्थक राजनैतिक नियुक्तियों की राह में रोड़ा,क्षेत्रीय संतुलन पर खरे नहीं उतर रहे सिंधिया के सुझाए नामScindia loyalists prove to be a stumbling block in the path of political appointments; the names proposed by Scindia fail to meet the criteria for regional balance

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भोपाल। मप्र में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों की शुरूआत लगभग हो चुकी है। हाल ही में प्रदेश भाजपा ने ग्वालियर की सियासत के सबसे बड़े चेहरों में से एक जयभान सिंह पवैया को वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया है। ऐसे में भाजपा ने नवरात्रि के शुभ दिनों में राजनीतिक नियुक्तियों शुरू कर निगम मंडलों में नियुक्तियों के संकेत दे दिए है। पार्टी सूत्रों की माने तो प्रदेश भाजपा 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक संतुलन साधने के लिए क्षेत्रिय और जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखेगी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस पैमाने पर सिंधिया समर्थक राजनैतिक नियुक्तियों की राह में रोड़ा बने हुए हैं। यानी कुछ सिंधिया समर्थकों के कारण निगम-मंडलों-प्राधिकरणों में नियुक्तियां लटक गई हैं।जानकारी के अनुसार, निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोग में पद पाने के लिए दूसरे बड़े नेताओं के साथ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक भी मैदान में हैं


। बताया गया है कि सिंधिया ने अपने पांच समर्थकों को निगम-मंडल में पद देने के लिए उनके नाम प्रदेश संगठन के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास भेजे थे। इनमें से कुछ नामों पर सहमति भी बन चुकी है, लेकिन दो से तीन नामों पर क्षेत्रीय संतुलन की वजह से मुहर नहीं लग पा रही है। इसकी जानकारी मिलने पर केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दो से तीन बार मुलाकात की है। पार्टी सूत्रों की मानें तो केन्द्रीय गाइडलाइन की वजह से सिंधिया समर्थकों के नामों पर असहमति बनी है।दो नामों को लेकर रारकहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी, तब उनके द्वारा मप्र के निगम मंडल में अपने 5 समर्थकों को जगह दिलाने का भी आग्रह किया गया था। इनमें से 3 नामों पर सहमति बन चुकी है। लेकिन अभी भी सिंधिया दो और नामों को एडजस्ट कराने के प्रयास में है। इसी वजह से निगम मंडलों की सूची जारी नहीं हो पा रही है। भोपाल में सिंधिया के सबसे करीबी युवा नेता कृष्णा घाडग़े का नाम भी निगम मंडल की दौड़ में लिया जा रहा है। उनके नाम की भी केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा सिफारिश की गई है। वहीं डबरा विधानसभा से चुनाव हारने वालीं इमरती देवी किसी बड़े निगम मंडल में पद पा सकती है। शिवराज सरकार में राज्य मंत्री रहे गिर्राज दंडोतिया भी निगम मंडल के जरिए अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखना चाहते हैं। सिंधिया समर्थक जसपाल सिंह जज्जी भी पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके है। ऐसे में उन्हें भी निगम मंडल में पद दिया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि सिंधिया समर्थक चाहते हैं कि जिस तरह शिवराज सिंह चौहान सरकार ने वर्ष 2021 में निगम मंडल और प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के 25 पदों पर नियुक्तियां की थीं, उसमें आधा दर्जन से अधिक नाम सिंधिया के करीबियों के थे। ऐसे वे इस बार भी वैसा प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद समर्थक लगाए हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि निगम मंडलों की सूची में सीएम मोहन यादव से लेकिन शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा रह सकता है। निगम मंडलों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है।

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