इंदौर से ओंकारेश्वर के बीच 'डेथ घाट' के नाम से मशहूर भेरूघाट अब इतिहास बनने वाला है. 33 किमी लंबे तेजाजीनगर-बलवाड़ा फोरलेन प्रोजेक्ट में बन रही तीन आधुनिक टनल न सिर्फ सफर के समय को 1 घंटा कम करेंगी, बल्कि सिंहस्थ 2028 से पहले श्रद्धालुओं को सुरक्षित सफर का तोहफा भी देंगी.
इंदौर से ओंकारेश्वर और खंडवा की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. मध्यप्रदेश का सबसे खतरनाक माना जाने वाला 'डेथ घाट' अब इतिहास बनने जा रहा है. इंदौर-इच्छापुर कॉरिडोर के तहत तेजाजीनगर से बलवाड़ा तक बन रहा 33.40 किलोमीटर लंबा फोरलेन प्रोजेक्ट प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला है. इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसमें बन रही तीन आधुनिक टनल हैं, जो न सिर्फ सफर का समय घटाएंगी बल्कि मौत के मोड़ों को भी सुरक्षित सफर में बदल देंगी.
पहाड़ चीरकर बन रही नई लाइफलाइन
इंदौर को ओंकारेश्वर, खंडवा, बुरहानपुर और महाराष्ट्र से जोड़ने वाला यह पुराना रास्ता हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है. पातालपानी जलप्रपात और चौरल घाटी के खूबसूरत नजारों के बीच तीखे मोड़ और गहरी ढलान वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत साबित होते थे. भारी ट्रैफिक और कम विजिबिलिटी के कारण यहां अक्सर जाम और हादसों की स्थिति बनी रहती थी. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए एनएचएआई (NHAI) ने करीब 33 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को आधुनिक बनाने का काम शुरू किया है, जिसके इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है.

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