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ठेकों की नीलामी : बचे 20 ग्रुप की 48 शराब दुकानों के लिए मात्र 4 ग्रुप के ही टेंडर आएAuction of Contracts: Tenders Received from Only 4 Groups for the 48 Liquor Shops Across the Remaining 20 Groups

 

प्रदेश में शराब दुकानों की नीलामी के पहले राउंड में जहां इंदौर डिवीजन सबसे आगे है, वहीं शहर स्तर के आंकड़े बताते हैं कि नीलामी में लोकेशन के हिसाब से बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इंदौर के चार समूहों के ताजा डेटा के अनुसार कुल 9,06,94,530 रुपए के रिजर्व प्राइस के मुकाबले 9,32,57,054 रुपए की बोली प्राप्त हुई है। यानी औसतन 2.83 प्रतिशत प्रीमियम मिला है। महारानी रोड समूह में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा रही, जहां 8 टेंडर आए और 23.51% अधिक बोली लगी।


इसके विपरीत खजरानी और मालवा मिल जैसे समूहों में सिर्फ 1-1 टेंडर आया और बोली लगभग रिजर्व प्राइस के बराबर रही। एमजी रोड में भी हल्की प्रतिस्पर्धा रही और मात्र 0.04% प्रीमियम मिला। इससे साफ है कि प्राइम कमर्शियल लोकेशन पर ही असली प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। लोकेशन बेस्ड डिमांड : महारानी रोड जैसे हाई-फुटफॉल एरिया में ज्यादा टेंडर और ऊंची बोली यह संकेत देती है कि ठेकेदार सेल्स पोटेंशियल के आधार पर आक्रामक बोली लगा रहे हैं। सिंगल टेंडर का ट्रेंड : तीन में से दो समूहों में सिंगल टेंडर आया। यह दर्शाता है कि या तो प्रतिस्पर्धा सीमित है या रिजर्व प्राइस पहले से ही ऊंचा रखा गया है।

औसत प्रीमियम कम, लेकिन जेबें भरने वाले पॉकेट अलग : कुल औसत सिर्फ 2.83% है, लेकिन एक ही समूह (महारानी रोड) पूरे औसत को ऊपर खींच रहा है। इंदौर डिवीजन आगे क्यों : ज्यादा व्यावसायिक गतिविध, हाई कंजम्प्शन मार्केट, बड़े प्लेयर्स की एंट्री। पिछले कुछ सालों में आबकारी विभाग का ट्रेंड रहा है कि एक तय टारगेट तक पहुंचने के बाद बचे ग्रुप में बार्गेनिंग का खेल शुरू हो जाता है। जो ग्रुप बचते हैं, उनमें ठेकेदार आसानी से बड़े प्रस्ताव नहीं देते।

उन्हें इंतजार रहता है विभाग की ओर से मिलने वाली ढील का। इस बार हालांकि सभी समूहों को सिंगल टेंडर के हिसाब से ही दुकानों का आवंटन हो रहा है, इसलिए बड़े ग्रुप भी इनमें हाथ आजमा रहे है। चौथे स्टेज में 20 में से मात्र चार समूह के लिए ही टेंडर आए हैं, इससे अभी विभाग को यह प्रक्रिया दो से तीन बार और करना होगी।

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