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बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ल, असहनीय बनी मोदी सरकार की चुप्पी ?The killing of Hindus in Bangladesh: Is the Modi government's silence becoming unbearable?


                       • रवि उपाध्याय 


लगभग एक साल से हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का दौर जारी है। अभी तक के एक माह के दौरान वहां 07 निर्दोष हिन्दुओं की गोली, चाकुओं से गोद कर,और जिंदा जला कर मार डाला जा चुका है। बांग्ला देश में वहशी हिंसा,लूट, आगजनी और हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार का यह सिलसिला अगस्त 2024 के बाद  से ही निर्बाध रूप से जारी है। वहशी हिंसा और बांग्लादेश में तख्ता पलटने के बाद  वहां की चुनी हुई पीएम शेख हसीना को अपनी जान बचाने के लिए भाग कर भारत आना पड़ा था। 

बांग्लादेश में जब से मुहम्मद युनुस तख्ता पलट करवाने के बाद मुख्य सलाहकार के रूप में आए हैं तब से ही वहां हिंसा का नंगा नाच चल रहा है। आश्चर्य जनक यह है कि मुहम्मद युनुस खान बांग्लादेश के नागरिक नहीं है। वे फ्रांस और यूएस के नागरिक हैं। उनकी बांग्ला देश में ताज पोशी अमेरिका द्वारा ही करवाई गई है। 


युनुस मियां के बांग्ला देश का मुख्य सलाहकार बनने के वहां के प्रतिबंधित संगठन जमात ए इस्लामी पर रोक हटाई और जो आतंकी वहां की जेलों में उन्हें रिहा कर दिया गया। वहां की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्तारूढ़ पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया और उसके फरवरी में होने वाले चुनावों में भाग लेने से रोक लगा दी गई। आवामी लीग के कार्यकर्ताओं पर हमले जारी हैं। वहां के आतंकी संगठन बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की बेटीऔर अपदस्थ की गईं पीएम शेख हसीना को फांसी पर लटकाना चाहते हैं।


बांग्लादेश के हालातों को भारत समेत पूरी दुनिया इस नरसंहार को देख रही है। हिंदुओं के घरों और मंदिरों को जलाया जा रहा है। हिंदू युवाओं पर ईश निंदा के झूठे आरोप लगा कर उनकी हत्याएं की जा रही हैं। दीपू चंद्र दास इस बर्बरता का अमानवीय उदाहरण है। इन घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाएं आंखों और मुंह पर पट्टी बांधे बैठी हैं। यही वह बांग्लादेश है जिसे पाकिस्तान की याह्या खान की बर्बर और बलात्कारी सेना के शिकंजे से मुक्त कराने के लिए भारत की सेना के लगभग चार हजार जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी और इस 1971 के युद्ध में हजारों जवान घायल हुए थे। इसका नतीजा हमारे सामने हैं। 


         सरकार दे दख़ल 


बांग्लादेश में 2024 से अब तक हिंदुओं पर हमलों और हत्याओं की कई घटनाएं हुई हैं। अगस्त 2024 से जून 2025 तक हिंदुओं पर 2,442 से ज्यादा हमले हुए, जिनमें मंदिरों पर तोड़फोड़, घर जलाना और हत्याएं शामिल हैं। इन हमलों में कम से कम 23 हिंदुओं की हत्या हुई है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 27 बताई गई है ।


हिंदुओं पर हमलों की कुछ प्रमुख घटनाएं: 


- बागेरहाट में स्कूल टीचर मृणाल कांति चक्रवर्ती की हत्या ।

- _रंगपुर में दुकानदार उत्तम कुमार बर्मन की ईशनिंदा के आरोप में लिंचिंग।

- नरसिंगदी में ज्वेलर प्रांतोष कर्मकार की गोली मारकर हत्या ।

- ढाका के पास भालुका में हिंदू युवक दीपू चंद्र की पीट-पीटकर हत्या ।

- _लक्ष्मीपुर सदर में एक घर में आग लगने से 7 साल की बच्ची की मौत ।


इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने भी चिंता जताई है और बांग्लादेश सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है ।


    भारत का मुस्लिम मौन क्यों ?


देश में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि देश के मुस्लिम धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाएं और संगठन पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसक घटनाओं, उनके घरों और संपत्तियों पर की जा रही आगजनी की घटनाओं तथा वहां अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ हो रही बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ उस तरह मुखर विरोध क्यों नहीं करता जिस तरह इजराइल के खिलाफ़ और गाजा के समर्थन में की भारत के शहरों में किया जाता रहा है। बतला दें कि जितनी बड़ी संख्या में मुस्लिम अराजनैतिक संघ उतने सामाजिक एनजीओ अन्य किसी समुदाय में नहीं है। मुस्लिम धार्मिक नेता 

सबसे अधिक बात गंगा जमुनी तहजीब और अमन पसंद होने का दावा करते हैं। इसके बाद भी उनकी चुप्पी खलती है ।

यदि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के समर्थन में आते हैं तो इससे भाई चारा और भी मजबूत ही होता।

    हिंदू और ईसाई संगठन भी मौन 

दुखद यह है कि बांग्लादेश में वहां के अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के खिलाफ भारत में रह रहे हिंदू और ईसाई संगठन भी चुप हैं। इन संगठनों ने भी संगठित हो कर कभी प्रभावी विरोध नहीं किया। इसके खिलाफ बार बार दिल्ली स्थित बांग्लादेश दूतावास पर प्रदर्शन किया जाना चाहिए। 


भारत सरकार को इस मामले को संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन में भी उठाना चाहिए। 


( लेखक राजनैतिक समीक्षक एवं एक व्यंग्यकार हैं। )

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