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मुकदमे के दौरान संपत्ति खरीदने वाले को 'बोना फाइड खरीदार' का संरक्षण नहीं मिलेगा: सुप्रीम कोर्टDuring the trial, the person who purchased the property will not receive the protection of being a 'bona fide buyer': Supreme Court

 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संपत्ति का हस्तांतरण (बिक्री) उस समय किया जाता है जब उस पर विशिष्ट निष्पादन (specific performance) का मुकदमा पहले से लंबित हो, तो ऐसे खरीदार को विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 19(b) के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम, 1882 की धारा 52 के तहत Lis Pendens (लंबित मुकदमे के दौरान किया गया हस्तांतरण) का सिद्धांत लागू होगा। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयाँ की खंडपीठ ने कहा कि धारा 19(b) केवल उन खरीदारों को सुरक्षा देती है जो ईमानदारी से, मूल्य चुकाकर और बिना किसी पूर्व अनुबंध की जानकारी के संपत्ति खरीदते हैं। लेकिन यदि संपत्ति की खरीद मुकदमा दर्ज होने के बाद की जाती है, तो उस पर Lis Pendens का नियम लागू होता है और खरीदार “बोना फाइड” होने का दावा नहीं कर सकता।


जैसे ही किसी अनुबंध से संबंधित मुकदमा दायर होता है और उसके बाद संपत्ति का हस्तांतरण किया जाता है, तब विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 19(b) को पीछे हटना होगा और स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम की धारा 52 लागू होगी।” मामले की पृष्ठभूमि इस मामले में मूल खरीदार ने वर्ष 1973 में संपत्ति खरीदने का समझौता किया था। जब विक्रेता ने सौदा पूरा नहीं किया, तो 1986 में पुणे की अदालत में specific performance का मुकदमा दायर किया गया और Lis Pendens का नोटिस भी दर्ज किया गया। मुकदमा लंबित रहते हुए, विक्रेता ने 1987 से 1989 के बीच संपत्ति के हिस्से कई तीसरे पक्षों को बेच दिए। एक खरीदार ने तो वहां बंगला भी बना लिया

। इसके बावजूद, ट्रायल कोर्ट ने 1990 में मूल खरीदार के पक्ष में डिक्री दे दी। बाद में जब मूल खरीदार ने कब्जा लेने के लिए अदालत से गुहार लगाई, तो बाद में खरीदने वालों ने आपत्ति की और खुद को “स्वतंत्र मालिक” बताया। लेकिन उनकी आपत्तियां खारिज कर दी गईं। सुप्रीम कोर्ट का विश्लेषण अदालत ने दो स्थितियों में फर्क स्पष्ट किया: मुकदमा दर्ज होने से पहले संपत्ति खरीदी जाए अगर संपत्ति समझौते के बाद लेकिन मुकदमे से पहले बेची जाती है, तो खरीदार धारा 19(b) के तहत यह साबित कर सकता है कि वह: मूल्य देकर खरीदा ईमानदारी से खरीदा उसे पहले के अनुबंध की कोई जानकारी नहीं थी तो उसे संरक्षण मिल सकता है।

 मुकदमा दर्ज होने के बाद संपत्ति खरीदी जाए लेकिन यदि संपत्ति मुकदमा दायर होने के बाद खरीदी जाती है, तो: धारा 52 TPA (Lis Pendens) लागू होगी खरीदार का बोना फाइड होने का दावा महत्वहीन हो जाएगा वह खरीदार अदालत के फैसले से बंधा होगा अदालत ने कहा कि “नोटिस” का मतलब केवल वास्तविक जानकारी नहीं, बल्कि निर्मित (constructive) और अनुमानित (imputed) जानकारी भी होती है। फैसले का निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि अपीलकर्ता ने संपत्ति मुकदमे के दौरान खरीदी थी, इसलिए: उस पर Lis Pendens लागू होगा वह डिक्री को रोक नहीं सकता धारा 19(b) का संरक्षण उसे नहीं मिलेगा इस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी।

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