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मुख्यमंत्री का फोन नहीं उठता तो अफसर जनता की घंटी क्यों सुनेंगे?

प्रणव बजाज

मोहन यादव के पास 12 विभाग, ऊपर से नीचे तक अफसरों की पूरी फौज; फिर भी सवालों के जवाब के लिए जनता और पत्रकार दर-दर क्यों भटकें?


भोपाल। मध्यप्रदेश में शासन और जनता के बीच संवाद की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय तथा पशुपालन एवं डेयरी सहित 12 विभागों की जिम्मेदारी बताई गई है।


इतने बड़े विभागीय दायरे के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री तक किसी जरूरी मामले में सीधे पहुंच बनाना मुश्किल हो, तो उनके अधीन काम करने वाली नौकरशाही तक आम आदमी और पत्रकार की आवाज कितनी आसानी से पहुंचती है?


जनसंपर्क विभाग में मनीष सिंह सबसे अहम कड़ी



सरकारी जनसंपर्क संचालनालय की आधिकारिक संपर्क सूची में मनीष सिंह को आयुक्त जनसंपर्क दर्ज किया गया है। 

फरवरी 2026 में मनीष सिंह को दोबारा आयुक्त जनसंपर्क बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। उस समय उनके पास परिवहन संबंधी जिम्मेदारी भी जारी रहने की बात कही गई थी।


यहां सवाल किसी एक अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जिसका मूल उद्देश्य ही सरकार और जनता तथा सरकार और समाचार माध्यमों के बीच संवाद कायम करना है। लेकिन मनीष सिंह ना हि फोन उठाते हैं और ना हि कुर्सी पर बेढते हैं ?


गृह विभाग : संजय कुमार शुक्ल


मई 2026 के प्रशासनिक फेरबदल में संजय कुमार शुक्ल को अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग बनाया गया था। उनके पास विमानन विभाग का अतिरिक्त दायित्व भी दिया गया था।


गृह विभाग सीधे मुख्यमंत्री के पास है। ऐसे में कानून-व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था और नागरिकों की शिकायतों से जुड़े मामलों में विभागीय जवाबदेही का महत्व और बढ़ जाता है।


सामान्य प्रशासन : शिवशेखर शुक्ला की स्थिति बदली


मई 2026 में शिवशेखर शुक्ला को अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग बनाया गया था। लेकिन अक्टूबर 2026 के ताजा प्रशासनिक फेरबदल में शिवशेखर शुक्ला को सामान्य प्रशासन से हटाकर अध्यक्ष, राजस्व मंडल बनाया गया है। इसलिए पुरानी पदस्थापना को वर्तमान पद के रूप में लिखना गलत होगा।


यही उदाहरण बताता है कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियां लगातार बदल रही हैं। जनता के लिए सवाल यह है कि किस विभाग की जिम्मेदारी आज किस अधिकारी के पास है, यह जानने की सरल और स्पष्ट व्यवस्था कहां है?

खनिज साधन : विवेक कुमार पोरवाल

जून 2026 के प्रशासनिक फेरबदल में विवेक कुमार पोरवाल को प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग बनाया गया था। खनन से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री स्वयं विधानसभा में खनिज साधन विभाग से संबंधित सवालों के जवाब देते रहे हैं।

नर्मदा घाटी विकास : डॉ. ई. रमेश कुमार


प्रशासनिक फेरबदल में डॉ. ई. रमेश कुमार को नर्मदा घाटी विकास विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। वे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभालते हैं।

उद्योग विभाग : नीरज मंडलोई

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग में नीरज मंडलोई की महत्वपूर्ण भूमिका दर्ज है। अगस्त 2026 की सरकारी कार्यक्रम संबंधी रिपोर्ट में उन्हें मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम से जुड़े दायित्वों के साथ दर्ज किया गया है।

असली सवाल—फोन कौन उठाएगा?

मध्यप्रदेश सरकार ने जनता की शिकायतों के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 की व्यवस्था कर रखी है। आधिकारिक वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराने, उसकी स्थिति जानने और अन्य माध्यमों की सुविधा उपलब्ध है।


लेकिन लोकतंत्र में केवल शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।


एक पत्रकार जब किसी गंभीर मामले पर तथ्य पूछने के लिए अधिकारी को फोन करता है, तो उसे यह जानने का अधिकार है कि सरकार का पक्ष क्या है। किसी अधिकारी का तत्काल फोन न उठा पाना अपने आप में दोष का प्रमाण नहीं है—बैठक, दौरा या अन्य प्रशासनिक काम कारण हो सकते हैं। लेकिन यदि महत्वपूर्ण मामलों में बार-बार संपर्क के बावजूद जवाब न मिले, तो यह प्रशासनिक संवाद की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़ा करता है।

और यहां मामला केवल पत्रकार का नहीं है।

आज पत्रकार फोन कर रहा है, कल वही सवाल किसी आम नागरिक का हो सकता है।

जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक भूमिका सरकार और समाचार माध्यमों के बीच संवाद की है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है—

अगर चौथे स्तंभ की घंटी का जवाब नहीं मिलेगा, तो जनता की आवाज सरकार तक कौन पहुंचाएगा?

बौद्धिक प्रतिकार की पड़ताल अब इस सवाल पर है—

मुख्यमंत्री के 12 विभागों में जनता की शिकायत सुनने और पत्रकार के सवाल का जवाब देने की वास्तविक जवाबदेही आखिर किस अधिकारी की है?

सरकार को विभागवार स्पष्ट करना चाहिए कि प्रत्येक विभाग में जनता और पत्रकारों के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन है, शिकायत का उत्तर कितने समय में मिलेगा और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था क्या है।

क्योंकि लोकतंत्र में सरकार का काम केवल आदेश जारी करना नहीं, जवाब देना भी है।

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