पुरानी मशीन की उपयोगिता जांचे बिना नई खरीद का आरोप; पत्नी डॉ. शिखा घनघोरिया की भूमिका भी जांच के दायरे में, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच और उच्च न्यायालय में याचिका से बढ़ा मामला
इंदौर। महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में लगभग आठ करोड़ रुपये की अगली पीढ़ी अनुक्रमण मशीन की खरीदी का विवाद अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अरविंद घनघोरिया को आरोप पत्र जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव को आरोप पत्र तामील कराने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन बिंदुओं पर उठे गंभीर सवाल
विभागीय आरोप पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2022 से उपलब्ध पुरानी मशीन की स्थिति, उपयोगिता और मरम्मत के जरिए उसे दोबारा चालू करने की संभावना का उचित परीक्षण किए बिना नई मशीन खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसे 12 अप्रैल 2025 की कार्यकारिणी समिति की अनुशंसा के विपरीत बताया गया है।
दूसरा सवाल केंद्र से मिली लगभग चार करोड़ रुपये की शेष राशि का है। आरोप है कि शासन को भेजे प्रस्ताव में इस राशि की स्थिति स्पष्ट किए बिना करीब आठ करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मांगी गई। तीसरी आपत्ति सरकारी धन के मितव्ययी उपयोग और वित्तीय अनुशासन से जुड़ी है। विभाग ने इन आरोपों को मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के उल्लंघन से संबंधित बताया है। आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं; डॉ. घनघोरिया को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
डॉ. शिखा घनघोरिया की भूमिका पर भी सवाल
मामले में डॉ. अरविंद घनघोरिया की पत्नी डॉ. शिखा घनघोरिया का नाम भी सामने आया है। वे संबंधित निविदा तकनीकी समिति की अध्यक्ष थीं। शिकायतकर्ता राकेश भाबर ने उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर कर खरीद प्रक्रिया की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने वर्ष 2025 में इस मामले में प्रकरण दर्ज किया था। पांच अक्टूबर 2026 को डॉ. अरविंद घनघोरिया और डॉ. शिखा घनघोरिया से पूछताछ किए जाने की खबर भी प्रकाशित हुई है। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है।
गवाहों में अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम
प्रकाशित आरोप पत्र संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, टी.एस. बघेल, डॉ. सचिन शर्मा, डॉ. मनीष पुरोहित, डॉ. शैलेश राय, डॉ. पूजा प्रपन्ना, डॉ. अक्षरादित्य शुक्ला, जैव-चिकित्सा अभियंता प्रेरक बंसोड़ और औषधि विक्रेता संजय उपाध्याय को गवाह बनाया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब महाविद्यालय में पहले से मशीन उपलब्ध थी, तो नई मशीन खरीदने की जरूरत का तकनीकी और वित्तीय आकलन कितना ठोस था? विभागीय जवाब, जांच के निष्कर्ष और न्यायालय की कार्यवाही से ही इस सवाल का अंतिम उत्तर सामने आएगा।
स्रोत: 9 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित समाचार रिपोर्ट तथा मशीन खरीदी मामले से संबंधित न्यायालयीन कार्यवाही की रिपोर्टें।

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