दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करने का निर्देश देकर जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारियों पर अदालत के सामने सरकारी पत्राचार को लेकर गलत बयान देने के आरोप हैं।
मामले में न्यायमूर्ति मधु जैन ने सीबीआई के विशेष न्यायाधीश को अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया है। सूची में सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के नाम शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच से जुड़ा है। अदालत में सरकारी मंत्रालय के साथ पत्राचार की स्थिति को लेकर सीबीआई के बयान पर सवाल उठे। आरोप है कि अधिकारियों ने ऐसी जानकारी दी, जो उपलब्ध सरकारी अभिलेखों से मेल नहीं खाती थी।
हाईकोर्ट ने आरोपों को गंभीर मानते हुए झूठे साक्ष्य और अदालत में गलत दावा करने से संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई का आधार पाया। अदालत ने शिकायत को आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया।
अदालत का संदेश स्पष्ट है: जांच एजेंसियों के अधिकारियों को भी न्यायिक प्रक्रिया के प्रति जवाबदेह होना होगा। हालांकि, शिकायत दर्ज करने का आदेश अपने आप में अधिकारियों का अपराध सिद्ध होना नहीं है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी।

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