दूसरा भाग |
मंदिर की जमीन पर अस्पताल के हिस्से का आरोप, पर्यावरण अनुमति के बिना निर्माण पर जुर्माने की पुरानी रिपोर्ट और भंवरसला की जमीन की नई जांच—डॉ. विनोद भंडारी के सामने फिर उठे सवाल
प्रणव बजाज
इंदौर। श्री अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विनोद भंडारी से जुड़े मामलों में केवल आयुष्मान योजना का विवाद ही नहीं, बल्कि जमीन, निर्माण और संपत्ति की जांच से जुड़े पुराने प्रकरण भी सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने आए हैं। प्रमुख तथ्य बिंदुवार इस प्रकार हैं।
1. आयुष्मान योजना में 42 करोड़ रुपये का दावा
मार्च 2023 में मध्यप्रदेश राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने श्री अरविंदो अस्पताल को योजना के कथित उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जांच दल का आरोप था कि कुछ पात्र लाभार्थियों को योजना में दर्ज किए बिना नकद भुगतान वाले मरीजों की तरह रखा गया और योजना में शामिल सामग्री के लिए भी पैसे लिए गए। डॉ. भंडारी ने नोटिस को गलत तथ्यों पर आधारित बताते हुए लगभग 42 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया था। उपलब्ध रिपोर्ट से नोटिस पर अंतिम निर्णय और भुगतान के दावे का निपटारा स्पष्ट नहीं होता।
2. मंदिर की जमीन पर अस्पताल के हिस्से का आरोप
अगस्त 2024 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भंवरसला स्थित श्री बैजनाथ मंदिर की सर्वे नंबर 13/1 की जमीन पर कथित कब्जे की जांच के बाद प्रशासन ने डॉ. भंडारी सहित अन्य लोगों को नोटिस जारी किए थे। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि करीब 4,000 वर्गफीट जमीन पर अस्पताल भवन का हिस्सा और लगभग 5,000 वर्गफीट पर पार्किंग व सड़क बनी हुई थी। यह प्रशासनिक जांच और नोटिस से जुड़ा मामला है; इसे अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
3. पर्यावरण अनुमति के बिना निर्माण पर पुराना न्यायिक दंड
दैनिक भास्कर की पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, श्री अरविंदो परिसर में 20,000 वर्गमीटर से अधिक निर्माण के लिए आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं लेने के मामले में अदालत ने डॉ. भंडारी और एक अन्य अधिकारी पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया था। रिपोर्ट में छात्रावास, सभागार, आवासीय भवन और अन्य निर्माणों का उल्लेख था। इस मामले का प्रमाणित न्यायिक आदेश और बाद की अपील की स्थिति दोबारा देखना जरूरी है।
4. भंवरसला की जमीन पर नई जांच
4 अगस्त 2026 की एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि डॉ. भंडारी और उनसे जुड़े लोगों के नाम पर भंवरसला क्षेत्र के करीब 50 सर्वे नंबरों की जमीन को लेकर बेनामी संपत्ति और आय से अधिक संपत्ति संबंधी शिकायतों की जांच शुरू हुई। रिपोर्ट में सर्वे नंबर 14/1/1, 14/2, 15/2, 15/1/3, 159/1/2/1, 158/2 सहित अन्य जमीनों का उल्लेख है। यह आरोप और जांच का विषय है; किसी संपत्ति को बेनामी या अवैध घोषित करने का अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी या अदालत के आदेश से ही निकलेगा।
5. करीब 15 एकड़ जमीन की कुर्की और अदालतों के आदेश
जमीन से जुड़े पुराने धनशोधन प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय ने भंवरसला की करीब 15 एकड़ जमीन कुर्क की थी। अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिला अदालत ने जमीन को मुक्त करने का आदेश दिया, जबकि इससे पहले उच्च न्यायालय की कार्यवाही में जमीन मुक्त करने का पुराना आदेश निरस्त किया गया था। हालिया आदेश, उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश और प्रवर्तन निदेशालय की अगली कार्रवाई को प्रमाणित न्यायिक दस्तावेजों से मिलाना जरूरी है। कुर्की या संपत्ति-मुक्ति की कार्यवाही अपने आप अपराध में दोषसिद्धि नहीं होती।
6. अस्पताल के पीछे जमीन पर कब्जे का विवाद और फायरिंग
अगस्त 2024 में अरविंदो अस्पताल के पीछे जमीन खाली कराने पहुंची राजस्व टीम के सामने फायरिंग की घटना की खबरें प्रकाशित हुई थीं। रिपोर्टों में अस्पताल प्रबंधन और सुरेश पटेल परिवार के बीच लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद, अदालत के आदेश और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का उल्लेख था। यह जमीन विवाद मंदिर की जमीन और अस्पताल निर्माण के मामले से अलग है; दोनों को एक ही प्रकरण मानना सही नहीं होगा।
7. व्यापमं पीएमटी प्रकरण और संपत्ति की जांच
डॉ. भंडारी का नाम व्यापमं पीएमटी-2012 प्रकरण में भी आया था। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कथित आय और संपत्ति के स्रोत पर सवाल उठे थे। दूसरी ओर, डॉ. भंडारी ने कुछ राशि को हुंडी और ऋण से प्राप्त आय बताया था। इस मामले की मौजूदा स्थिति, संबंधित आदेश और अंतिम न्यायिक निष्कर्षों की पुष्टि के बिना किसी आरोप को सिद्ध तथ्य की तरह प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए।
8. अस्पतालों की वैधता और निर्माण की जांच कौन करेगा?
अब जिला प्रशासन, नगर निगम, राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग से यह स्पष्ट होना चाहिए कि अस्पताल परिसर की जमीन का स्वामित्व, सीमांकन, भूमि उपयोग, भवन अनुज्ञा, स्वीकृत नक्शा, पूर्णता प्रमाणपत्र और पर्यावरणीय स्वीकृति की वर्तमान स्थिति क्या है। जहां शिकायतें दर्ज हुईं, वहां जारी नोटिस, जांच रिपोर्ट और अंतिम आदेश सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
9. आयुष्मान के भुगतान और मरीजों की जिम्मेदारी
अस्पताल संगठनों ने भुगतान में देरी और कटौती के कारण बड़ी रकम लंबित होने का दावा किया है। दूसरी ओर, योजना के नियमों के पालन और मरीजों से अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। सरकार को अस्पतालवार बकाया, लंबित दावों, कारण बताओ नोटिसों और अंतिम कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
10. प्रशासन से सीधे सवाल
मंदिर की जमीन से संबंधित नोटिस पर अंतिम कार्रवाई क्या हुई?
अस्पताल परिसर के सभी निर्माणों की स्वीकृति और पर्यावरणीय अनुमति की स्थिति क्या है?
भंवरसला की जमीन संबंधी नई शिकायत में किन सर्वे नंबरों की जांच चल रही है?
कुर्क जमीन पर अदालतों के नवीनतम आदेश क्या हैं?
2023 के आयुष्मान नोटिस पर अंतिम निर्णय क्या हुआ?
डॉ. भंडारी के 42 करोड़ रुपये के दावे का सरकारी हिसाब क्या है?
इंदौर के मरीजों का इलाज प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार की क्या व्यवस्था है?
इन मामलों में आरोप, प्रशासनिक नोटिस, जांच और न्यायालय के आदेश अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं। निष्पक्ष पड़ताल का तकाजा है कि संबंधित विभागों से दस्तावेजी जवाब लिया जाए और डॉ. विनोद भंडारी तथा अस्पताल प्रबंधन का वर्तमान पक्ष भी प्रकाशित किया जाए।

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