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एक करोड़ की कथित डील पर भोपाल में भूचाल! उपमुख्यमंत्री के ओएसडी को हटाए जाने की चर्चा, अब जांच पर निगाहें

प्रणव बजाज

फर्जी एफडीआर से शराब ठेकों का आरोप; 50 लाख नकद और 50 लाख खाते में भेजने के दावे ने बढ़ाए सवाल



भोपाल। मध्यप्रदेश में शराब ठेकों को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों के बीच उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी दीपम रायचूरा को हटाए जाने की खबर ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, उनके पद से हटाए जाने के आदेश और उसके आधिकारिक कारण की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सामान्य प्रशासनिक फेरबदल है या कथित शराब ठेका प्रकरण से जुड़ी कोई कार्रवाई?

प्रकाशित रिपोर्टों में करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया के बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने के लिए एक करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। दावा है कि 50 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि शेष 50 लाख रुपये होटल के खाते में जमा कराए गए।

इसी मामले में शराब ठेकों के लिए कथित फर्जी सावधि जमा रसीदों के इस्तेमाल और उनके सत्यापन में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो जांच केवल कथित भुगतान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। ठेका आवंटन की फाइलें, बैंक अभिलेख, जमा रसीदों का सत्यापन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

दीपम रायचूरा ने प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार रिश्वत के आरोपों को झूठा बताया है। इसलिए किसी भी व्यक्ति की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले दोष सिद्ध मानना उचित नहीं होगा।

अब जवाबदेही के चार सवाल

क्या ओएसडी को हटाए जाने का आधिकारिक आदेश जारी हुआ है? यदि हुआ, तो उसके पीछे दर्ज कारण क्या हैं? क्या कथित एक करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच होगी? और क्या आबकारी विभाग टीटी नगर की दोनों दुकानों की ठेका प्रक्रिया तथा एफडीआर सत्यापन का पूरा ब्योरा सामने रखेगा?

मामला आरोपों से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है। अब सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई ही बताएगी कि इन गंभीर आरोपों की तह तक पहुंचने की कितनी इच्छाशक्ति है।

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