2023 में श्री अरविंदो अस्पताल को मिला था कारण बताओ नोटिस; डॉ. बी.एस. सैत्या की जांच में उठे थे सवाल, डॉ. विनोद भंडारी ने भुगतान का मुद्दा उठाया—अब इंदौर के अस्पतालों के बहिष्कार से मरीजों पर संकट
इंदौर। आयुष्मान भारत योजना में सरकारी भुगतान और अस्पतालों की जवाबदेही का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। श्री अरविंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विनोद भंडारी का नाम मार्च 2023 में सामने आया था, जब मध्य प्रदेश राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने योजना के नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
22 मार्च 2023 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.एस. सैत्या ने कहा था कि जांच में अस्पतालों द्वारा मरीजों से अतिरिक्त पैसे लेने के मामले सामने आए हैं। श्री अरविंदो अस्पताल के संबंध में जांच दल ने आरोप लगाया था कि कुछ पात्र आयुष्मान लाभार्थियों को योजना में दर्ज किए बिना नकद भुगतान वाले मरीजों के रूप में रखा गया और योजना में शामिल सामग्री के लिए भी पैसे लिए गए।
डॉ. विनोद भंडारी ने उस समय नोटिस को गलत तथ्यों पर आधारित बताते हुए कहा था कि उन्होंने राज्य स्वास्थ्य एजेंसी और स्वास्थ्य आयुक्त को जवाब दिया है। उन्होंने एजेंसी पर करीब 42 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा भी किया था। यह उनका तत्कालीन दावा था; उसके अंतिम निपटारे की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट से नहीं होती।
60 अस्पतालों के बहिष्कार से फिर बढ़ा विवाद
अक्टूबर 2026 में निजी अस्पताल संगठनों ने भुगतान में देरी, दावों में कटौती और एनएबीएच प्रमाणन की अनिवार्यता के विरोध में आठ अक्टूबर से आयुष्मान योजना के बहिष्कार का ऐलान किया था। प्रकाशित रिपोर्टों में इंदौर के करीब 60 अस्पतालों के इस कदम में शामिल होने की बात कही गई। अस्पताल संगठनों ने 400 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान अटके होने का दावा भी किया है, हालांकि इस रकम का अस्पतालवार सरकारी हिसाब सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
इस विवाद पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. भजनलाल शरणागत, यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विशाल सिंह बघेल और संगठन के सलाहकार डॉ. जीशान अहमद ने भी भुगतान तथा प्रमाणन संबंधी समस्याएं उठाई हैं।
एनएबीएच की नई स्थिति भी जांच के घेरे में
श्री अरविंदो अस्पताल के पुराने एनएबीएच प्रमाणपत्र में 7 सितंबर 2026 तक की वैधता दर्ज थी। अस्पताल की वेबसाइट उसे पूर्ण एनएबीएच मान्यता प्राप्त संस्थान बताती है। वर्तमान प्रमाणपत्र के नवीनीकरण का दस्तावेज देखे बिना मान्यता समाप्त होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
सरकार से सीधे सवाल
डॉ. विनोद भंडारी के 42 करोड़ रुपये के दावे का क्या हुआ? डॉ. बी.एस. सैत्या की जांच के बाद जारी नोटिस पर अंतिम फैसला क्या हुआ? इंदौर के अस्पतालों का वास्तविक लंबित भुगतान कितना है? और बहिष्कार की स्थिति में गरीब आयुष्मान मरीजों का इलाज कैसे जारी रहेगा?
आयुष्मान योजना में न आरोप अंतिम फैसला हैं, न भुगतान का दावा अपने आप सरकारी बकाया साबित करता है। स्वास्थ्य विभाग को जांच का परिणाम, भुगतान का हिसाब और अस्पतालों की वर्तमान संबद्धता सार्वजनिक करनी चाहिए। मरीजों को सरकारी योजना के भरोसे इलाज मिलता है—इस भरोसे पर असर पड़ने की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

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