नई दिल्ली। भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन दुनिया ने वह तस्वीर देखी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में लंबे समय तक चर्चा होगी—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक मंच पर। भारत ने इस जमावड़े को सिर्फ सम्मेलन नहीं रहने दिया, बल्कि आतंकवाद, वैश्विक व्यापार और बदलती विश्व व्यवस्था पर अपनी कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया।
सबसे बड़ा संदेश नई दिल्ली घोषणापत्र से आया। BRICS देशों ने सर्वसम्मति से पहलगाम में 26 लोगों की हत्या करने वाले आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात दोहराई। घोषणापत्र में आतंकियों, उनके मददगारों और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत भी रेखांकित हुई। हालांकि पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया गया, फिर भी पहलगाम का स्पष्ट उल्लेख भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता है।
दूसरे दिन मोदी ने दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, कजाकिस्तान समेत कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। सम्मेलन में वैश्विक विकास, तकनीक, व्यापार और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार पर भी चर्चा हुई। एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक दबावों पर BRICS ने चिंता जताई।
सबसे ज्यादा नजर मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर रही। करीब सात साल बाद भारत आए जिनपिंग के साथ मोदी ने सीमा पर शांति, स्थिरता और पारस्परिक सम्मान की जरूरत पर जोर दिया। चीन अब अगले BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
भारत की रणनीति साफ है—किसी एक खेमे का हिस्सा बने बिना रूस, चीन और ग्लोबल साउथ के साथ अपने हित साधना। यही इस सम्मेलन की असली कूटनीतिक तस्वीर है।

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