मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी और दुनिया के बड़े महानगरों में शुमार मुंबई में कचरे और गंदगी की समस्या पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई की स्थिति ही संतोषजनक नहीं है, तो मुंबई को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर कैसे कहा जा सकता है?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने शहर के सभी 26 वार्डों में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की सूची मांगी है। साथ ही BMC से सफाई के लिए लागू SOP यानी मानक संचालन प्रक्रिया भी पेश करने को कहा गया है। कोर्ट का रुख साफ है—व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
सवाल केवल सड़कों पर पड़े कचरे का नहीं है। मुंबई जैसे महानगर में सफाई व्यवस्था सीधे नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और शहर की छवि से जुड़ी है। करोड़ों रुपये का बजट होने के बावजूद यदि नियमित सफाई, कचरा उठाने और निगरानी की व्यवस्था प्रभावी नहीं है, तो जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
हाई कोर्ट की सख्ती ने BMC के सामने अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कागजों पर बनी सफाई व्यवस्था जमीन पर भी दिखाई देगी? अदालत ने इसे आखिरी मौका माना है, इसलिए अब सिर्फ दावे नहीं, बल्कि 26 वार्डों में वास्तविक बदलाव दिखाई देना जरूरी होगा।

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