चंडीगढ़। पंजाब की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले ड्रग्स का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि राज्य में नशे की समस्या से निपटने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि इस बार पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनना तय है और पार्टी के पक्ष में जनता का रुख स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
पायलट ने आम आदमी पार्टी को कांग्रेस का मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बताते हुए सरकार की नशा विरोधी मुहिम पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रग्स का नेटवर्क रोकने के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।
सबसे गंभीर आरोप उन्होंने ड्रग्स माफिया और सरकार के बीच कथित गठजोड़ को लेकर लगाया। हालांकि इस आरोप के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कौन-से दस्तावेज या ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए, यह स्पष्ट होना जरूरी है। यही वह बिंदु है जहां पंजाब की राजनीति में आरोप और तथ्य के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
कांग्रेस अब ड्रग्स को आगामी चुनाव का बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रही है। पायलट का ‘100 प्रतिशत सरकार बनाने’ का दावा पार्टी के आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन असली परीक्षा चुनावी मैदान में होगी। सवाल यह भी है कि कांग्रेस अपने पिछले शासनकाल के दौरान नशे के खिलाफ कार्रवाई का क्या रिकॉर्ड जनता के सामने रखेगी और AAP सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है।
पंजाब में ड्रग्स सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि युवाओं और परिवारों से जुड़ा गंभीर सामाजिक संकट है। ऐसे में चुनावी आरोपों के बीच जनता के सामने आंकड़े, कार्रवाई और वास्तविक परिणाम रखना दोनों दलों की जिम्मेदारी होगी।

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