‘एक्सिओम-2’ मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों पर हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों को संकेत मिले हैं कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान शरीर की जैविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। अंतरिक्ष यात्रियों में कुछ हफ्तों के प्रवास के दौरान ऐसे बदलाव देखे गए, जो पृथ्वी पर लंबे समय में दिखाई दे सकते हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक अंतरिक्ष का माइक्रोग्रैविटी वातावरण, विकिरण, नींद में बदलाव और शारीरिक तनाव शरीर की कोशिकाओं तथा जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन में खास बात यह रही कि पृथ्वी पर लौटने के बाद उम्र बढ़ने की यह तेज रफ्तार फिर धीमी पड़ती दिखाई दी।
शोधकर्ता अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये बदलाव कितने स्थायी हैं और अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने पर शरीर पर इनका प्रभाव कितना बढ़ सकता है। यह शोध भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों, खासकर चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि वैज्ञानिक इसे सीधे तौर पर यह कहने के बराबर नहीं मानते कि अंतरिक्ष यात्री वास्तव में उतने ही साल बूढ़े हो जाते हैं जितने पृथ्वी पर गुजरते। अध्ययन मुख्य रूप से जैविक उम्र और कोशिकीय बदलावों से जुड़े संकेतों की पड़ताल करता है।

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