नागोया। भारतीय भारोत्तोलन के लिए 23 सितंबर का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने आइची-नागोया एशियाई खेलों की महिलाओं की 49 किग्रा स्पर्धा में 198 किग्रा का कुल वजन उठाकर रजत पदक जीत लिया। इस पदक के साथ भारत का एशियाई खेलों में भारोत्तोलन पदक का 28 साल लंबा इंतजार खत्म हो गया।
मीराबाई ने स्नैच में 83 किग्रा से शुरुआत की और 85 तथा 87 किग्रा के सफल प्रयास किए। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 107 किग्रा उठाया और दूसरे प्रयास में 111 किग्रा का वजन सफलतापूर्वक उठाकर अपना कुल स्कोर 198 किग्रा पहुंचा दिया। यही प्रदर्शन उन्हें रजत पदक तक ले गया।
स्वर्ण पदक उत्तर कोरिया की री सोंग गुम ने 215 किग्रा के रिकॉर्ड कुल स्कोर के साथ जीता, जबकि इंडोनेशिया की लुलुक दियाना त्रि विजायना ने 191 किग्रा के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
मीराबाई के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एशियाई खेलों का पदक उनके करियर के बड़े अंतरराष्ट्रीय पदकों के संग्रह में अब तक missing था। वह टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता, विश्व चैंपियन और कई बार की राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन रह चुकी हैं। 2023 के हांगझोउ एशियाड में वह चौथे स्थान पर रही थीं।
भारत को इससे पहले एशियाई खेलों में भारोत्तोलन का पदक 1998 बैंकॉक एशियाड में कर्णम मल्लेश्वरी ने रजत के रूप में दिलाया था। 28 साल बाद मीराबाई ने भारतीय भारोत्तोलन को फिर एशियाड के पोडियम पर पहुंचा दिया।

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