दतिया। विधानसभा उपचुनाव में हार के करीब 49 दिन बाद भाजपा ने दतिया संगठन को नया जिलाध्यक्ष दे दिया है। माधवेंद्र सिंह परिहार की नियुक्ति के साथ अब पार्टी के सामने केवल अध्यक्ष चुनने की नहीं, बल्कि भंग हो चुके पूरे संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की चुनौती है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिहार की नियुक्ति की घोषणा की है। वे पहले दतिया भाजपा में जिला महामंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 4 अगस्त को उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह समेत जिला कार्यकारिणी, मंडल समितियों, मोर्चों, प्रकोष्ठों और अन्य संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया था। पार्टी ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति भी बनाई थी।
अब परिहार के नाम के साथ दतिया की अंदरूनी राजनीति का दूसरा पहलू भी चर्चा में है। कई रिपोर्टों में उन्हें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी बताया गया है। कुछ स्थानीय रिपोर्टें उनकी संघ पृष्ठभूमि का भी उल्लेख करती हैं। हालांकि भाजपा के नियुक्ति आदेश में उन्हें तोमर गुट का प्रतिनिधि या किसी नेता के प्रभाव को कम करने के लिए चुना गया है, ऐसा कोई कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, दतिया में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम स्वाभाविक रूप से इस बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में विधानसभा उपचुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों के विरोध की खबरें भी सामने आई थीं।
इसलिए फिलहाल सवाल यह नहीं कि नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव खत्म हो गया, बल्कि यह है कि नई जिला टीम बनाते समय भाजपा नेतृत्व किन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जगह देता है। वास्तविक संगठनात्मक संतुलन का संकेत नई कार्यकारिणी, मंडल अध्यक्षों और बूथ स्तर की नियुक्तियों से ज्यादा स्पष्ट होगा।

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