महू | विधायक उषा ठाकुर का गरबा संबंधी बयान अब केवल गरबा तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने तो विरोध किया ही, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता राधेश्याम यादव के सार्वजनिक सवालों ने विवाद को पार्टी के भीतर भी पहुंचा दिया है। अब चर्चा इस बात की है कि बयान पर आपत्ति सिर्फ विचारों का मतभेद है या महू भाजपा के बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत?
यादव ने विधायक के बयान में बताए गए साढ़े चार लाख लड़कियों के आंकड़े के स्रोत पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि किसी संवेदनशील मुद्दे पर तथ्य और भाषा दोनों की जिम्मेदारी जरूरी है। उन्होंने भाजपा नेताओं से हिंदू समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने और दूसरे क्षेत्रों के विषयों पर बयानबाजी से बचने की अपील भी की।
यहीं से महू की राजनीति का पुराना सवाल फिर सामने आता है—भाजपा में कौन किसके साथ है और किस मुद्दे पर किसके सुर मिलते हैं?
उषा ठाकुर करीब आठ वर्षों से महू की विधायक हैं। इस दौरान स्थानीय राजनीति में कई बदलाव हुए। पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार के भाजपा में आने से पार्टी का राजनीतिक दायरा बदला। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री डॉ. कविता पाटीदार की सक्रिय राजनीतिक भूमिका भी महू के समीकरणों में चर्चा का विषय रही है।
राधेश्याम यादव की राजनीतिक निकटताओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग चर्चाएं हैं। हालांकि किसी नेता की सार्वजनिक आपत्ति को केवल गुटबाजी का प्रमाण मानना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। लेकिन राजनीतिक संदेश जरूर साफ है—विपक्ष के सवालों के बीच जब सत्ता पक्ष के ही नेता आंकड़े और भाषा पर सवाल उठाएं, तो मामला सिर्फ बयान का नहीं रहता।
अब उषा ठाकुर के सामने सवाल कांग्रेस का नहीं, अपने ही राजनीतिक कुनबे के उठे सवालों का है।

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