उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी ने अपने पारंपरिक लाल रंग के साथ अब नीले रंग को भी जोड़ दिया है। पार्टी की छात्र सभा के कार्यकर्ताओं के लिए नई पोशाक के तौर पर नीली टी-शर्ट और नीली जींस तय की गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे बदलती पीढ़ी और नई सोच से जोड़ते हुए कहा कि जब नई पीढ़ी की सोच बदल रही है तो उसकी यूनिफॉर्म भी नई होनी चाहिए।
अखिलेश यादव के मुताबिक नीला रंग केवल कपड़ों का रंग नहीं है। इसे लोकतंत्र, संविधान, बहुजन आंदोलन और सामाजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के तौर पर पेश किया गया है। पार्टी का कहना है कि नई पोशाक युवाओं के बीच नए संदेश के साथ पहुंचेगी।
राजनीतिक तौर पर इस बदलाव को सपा की पीडीए रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के पीडीए में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक शामिल हैं। खासतौर पर नीला रंग बहुजन राजनीति और दलित आंदोलन से जुड़ा रहा है। ऐसे में छात्र सभा की पोशाक में नीला रंग शामिल करना युवा और दलित मतदाताओं तक पहुंच मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
यानी सपा के लिए यह सिर्फ लाल से नीले रंग में बदलाव नहीं, बल्कि चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक पहचान में नए सामाजिक समीकरण जोड़ने का संकेत भी है। अब देखना होगा कि यह रंग मैदान की राजनीति में कितना असर पैदा करता है।

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