मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में करीब ₹30.18 करोड़ के कथित घोटाले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में जनपद पंचायत सिरोंज के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। ईडी के मुताबिक मामला सरकारी विवाह सहायता राशि के कथित फर्जी वितरण और धनशोधन से जुड़ा है।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार 5,923 संदिग्ध विवाह मामलों के नाम पर सरकारी राशि स्वीकृत और वितरित की गई। आरोप है कि इनमें कई आवेदन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए और कागजों पर ऐसी शादियां भी दिखाईं गईं, जिनका वास्तविकता में कोई आधार नहीं था। कोरोना काल के दौरान भी कथित तौर पर ऐसे मामलों को मंजूरी मिलने का दावा सामने आया है।
मामला तब गंभीर हुआ जब अनियमितताओं को लेकर आर्थिक अपराध शाखा में प्राथमिकी दर्ज हुई। इसी आधार पर ईडी ने धनशोधन निवारण कानून के तहत जांच शुरू की। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन को फर्जी लाभार्थियों के नाम पर निकालकर कथित तौर पर उसका दुरुपयोग किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दस्तावेजों में 27 वर्षीय व्यक्ति की तीन बेटियां और उनके कन्यादान तक का रिकॉर्ड सामने आने की खबर है। घोटाला सामने आने के बाद कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब होने का आरोप भी जांच का हिस्सा है।
ईडी की कार्रवाई ने अब सवाल खड़ा किया है—हजारों फर्जी मामलों को सरकारी तंत्र ने सत्यापित कैसे किया और करोड़ों रुपये जारी होने तक निगरानी व्यवस्था कहां थी? जांच आगे बढ़ने पर अन्य अधिकारियों और लाभार्थियों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।

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