विटामिन B12 और D की कमी को लेकर तो अक्सर चर्चा होती है, लेकिन शरीर के लिए जरूरी एक और मिनरल मैग्नीशियम कई बार नजरअंदाज हो जाता है। यह शरीर में 300 से ज्यादा एंजाइम सिस्टम के काम में शामिल है और मांसपेशियों, नसों, ऊर्जा उत्पादन, ब्लड शुगर, हड्डियों और सामान्य हार्ट रिद्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मैग्नीशियम की कमी होने पर शुरुआत में थकान, कमजोरी, भूख कम लगना, जी मिचलाना या उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कमी बढ़ने पर हाथ-पैर में झनझनाहट, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन और दिल की धड़कन अनियमित होने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि केवल इन लक्षणों के आधार पर मैग्नीशियम की कमी तय नहीं की जा सकती।
हर व्यक्ति को सप्लीमेंट लेने की जरूरत भी नहीं होती। स्वस्थ लोगों में केवल कम खानपान के कारण गंभीर मैग्नीशियम की कमी आम नहीं है। लेकिन आंतों की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, लंबे समय तक शराब का सेवन, बढ़ती उम्र और कुछ दवाओं के कारण जोखिम बढ़ सकता है।
कहां से मिलेगा मैग्नीशियम? रोज की डाइट में पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चना-राजमा, साबुत अनाज, बादाम-काजू, बीज और अन्य पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
वयस्कों के लिए सामान्य जरूरत उम्र और लिंग के अनुसार करीब 310 से 420 मिलीग्राम प्रतिदिन होती है। लेकिन बिना सलाह के मैग्नीशियम सप्लीमेंट की ज्यादा मात्रा लेना भी ठीक नहीं—इससे दस्त, मतली और पेट में ऐंठन हो सकती है। किडनी की बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
यानी मैग्नीशियम को नजरअंदाज करना ठीक नहीं, लेकिन हर थकान या ऐंठन को इसकी कमी मानकर गोली शुरू करना भी सही तरीका नहीं है। संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह—यही सुरक्षित रास्ता है।
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