मुंबई/शिरडी। अशोक खरात से जुड़े मामले की जांच अब कथित वसूली और आर्थिक लेन-देन से आगे बढ़कर जमीन सौदों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। शिरडी के एक किसान की जमीन को कथित तौर पर बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचने के लिए दबाव डालने का आरोप कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज है। जांच एजेंसियां इस सौदे में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं।
मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जमीन की खरीद सिर्फ एक अलग घटना थी या कथित आर्थिक वसूली के पूरे नेटवर्क का हिस्सा—इसे लेकर एजेंसियां दस्तावेज, बैंकिंग लेन-देन और संबंधित लोगों के बीच संबंधों को खंगाल रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, शिरडी के अलावा उरण में भी कथित तौर पर कम कीमत पर जमीन खरीदने से जुड़े आरोप जांच के दायरे में आए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अन्य आरोपियों की भूमिका और आर्थिक लेन-देन की जांच की है। हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है—अगर किसी किसान को उसकी जमीन के वास्तविक मूल्य से कम कीमत पर सौदा करने के लिए दबाव में लाया गया था, तो उस सौदे के पीछे सिर्फ खरीदार की भूमिका थी या इसके पीछे कोई संगठित आर्थिक तंत्र भी काम कर रहा था? जांच आगे बढ़ने के साथ इस सवाल का जवाब अहम होगा।
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