उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 से पहले मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के घाटों की सफाई और सौंदर्यीकरण को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार की नई रणनीति के तहत प्रदेश के 16 जिलों में नर्मदा किनारे स्थित घाटों की व्यवस्था और स्वच्छता अभियान में स्थानीय विधायकों की भूमिका तय की जाएगी।
खास बात यह है कि इस काम के लिए विधायक निधि से राशि खर्च किए जाने की योजना है। यानी घाटों की सफाई, स्वच्छता व्यवस्था और आवश्यक सौंदर्यीकरण के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकास निधि का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सरकार का तर्क है कि सिंहस्थ के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मध्य प्रदेश पहुंचेंगे। ऐसे में केवल उज्जैन ही नहीं, बल्कि नर्मदा से जुड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भी व्यवस्थित और स्वच्छ रखना जरूरी है। नर्मदा के घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना को देखते हुए पहले से तैयारी करने की कवायद शुरू की जा रही है।
हालांकि, इस फैसले ने जवाबदेही और निगरानी को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विधायक निधि से पैसा खर्च होगा तो यह साफ होना चाहिए कि किस घाट पर कितना पैसा लगाया गया, काम किस एजेंसी या ठेकेदार को मिला और सफाई के बाद उसकी गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा।
सिंहस्थ के नाम पर करोड़ों रुपये के काम प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—घाट सच में चमकेंगे या सफाई के नाम पर सरकारी पैसा ही चमकेगा?

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