इंदौर को देश का सबसे अच्छा शहर बनाने के दावे खूब हुए, लेकिन सड़क पर तस्वीर इसके उलट दिखाई दे रही है। हेलमेट नहीं पहनने वालों के खिलाफ यातायात पुलिस ने एक लाख से ज्यादा चालान बना दिए, लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी सड़क हादसों में मौतों का सिलसिला क्यों नहीं थम रहा?
आज सिटी बस कार्यालय में इंदौर जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक होने जा रही है। बैठक में दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था सुधारने और जनहानि रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। लेकिन शहर का आम आदमी पूछ रहा है—बैठकें तो लगातार होती हैं, फिर सड़कें कब सुधरेंगी?
इंदौर के कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। कहीं अव्यवस्थित पार्किंग, कहीं अतिक्रमण, कहीं सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहन और कहीं यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी। कार्रवाई का सबसे आसान रास्ता चालान काटना बन गया है, लेकिन सड़क की मूल समस्या जस की तस है।
एक लाख से ज्यादा चालान यह बताने के लिए काफी हैं कि नियम तोड़े जा रहे हैं, लेकिन यह भी सवाल है कि क्या सिर्फ चालान से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है?
इंदौर को लगातार स्वच्छता और बेहतर शहर की मिसाल बताया जाता है। मगर यातायात व्यवस्था पर प्रशासन की चुप्पी अब सवाल खड़े कर रही है।
शहर पूछ रहा है—‘सबसे अच्छा शहर’ का तमगा सड़कों पर दिखाई क्यों नहीं देता?
जाम, अव्यवस्था और हादसों के बीच आखिर प्रशासन कब जागेगा?

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