बेमेतरा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ रक्षा को भारत के पुनर्जागरण और समृद्धि से जोड़ते हुए सरकारों पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गाय की रक्षा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-पद्धति और अर्थव्यवस्था से जुड़ा सवाल है। इससे पहले भी शंकराचार्य गौ रक्षा को लेकर देशभर में अभियान और यात्राएं करते रहे हैं।
शंकराचार्य का कहना है कि भारत को फिर से ‘सोने की चिड़िया’ और विश्वगुरु बनाने की बात तभी सार्थक होगी, जब गाय के संरक्षण को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने सरकारों से सवाल किया कि यदि गाय को लेकर समाज में इतनी गहरी आस्था है तो उसके संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई देती?
उन्होंने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने की मांग का मुद्दा भी उठाया और सरकारों की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उनका तर्क है कि केवल घोषणाओं और मंचों से गौ संरक्षण नहीं होगा, बल्कि इसके लिए जमीन पर व्यवस्था खड़ी करनी होगी।
शंकराचार्य के बयान ने एक बार फिर गौ रक्षा बनाम सरकारी नीति की बहस को सामने ला दिया है। सवाल सिर्फ धार्मिक भावनाओं का नहीं, बल्कि उन लाखों पशुपालकों और किसानों का भी है, जिनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पशुधन से जुड़ी है।
अब देखना यह है कि सरकारें शंकराचार्य के सवालों को केवल धार्मिक बयान मानकर आगे बढ़ती हैं या **गौ संरक्षण को लेकर कोई ठोस नीति और जवाबदेही तय करती हैं।**

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