पुलिस का मीत बना मनमीत! चार फरार आरोपियों पर भी कार्रवाई का इंतजार
इन्दौर : ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी के नाम पर हुए कथित निवेश फर्जीवाड़े की जांच अब खुद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। पीड़ितों का आरोप है कि मामले में मनमीत सिंह होरा उर्फ मोनू के खिलाफ बैंक खाते, वाट्सऐप समूह की गतिविधियां और बातचीत की रिकॉर्डिंग समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पुलिस को सौंपे गए, इसके बावजूद उसे अब तक प्रकरण में आरोपी नहीं बनाया गया। दूसरी ओर पांच माह से फरार बताए जा रहे चार आरोपियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी है।
क्राइम ब्रांच ने 16 मई को जिया वाधवानी की शिकायत पर हरप्रीत कौर उर्फ मोना, जसप्रीत उर्फ जस्सी, अनिरुद्ध दलवी, मुकेश तायड़े, जोसेफ सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया था। 23 मई को केवल हरप्रीत कौर गिरफ्तार हुई। सार्वजनिक रिपोर्टों में भी पुलिस ने बताया था कि निवेशकों को सौ दिनों में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करीब ढाई करोड़ रुपये जुटाए गए थे।
पीड़ितों का दावा है कि मनमीत सिंह होरा कथित निवेश समूह का प्रशासक था। शिकायत के मुताबिक 11 फरवरी 2025 को उसके मोबाइल नंबर से समूह में ए स्क्वेयर ग्लोबल कंसल्टेंसी के बैंक खाते की जानकारी साझा की गई थी। आरोप है कि बाद में समूह हटाने की गतिविधि में भी उसकी भूमिका रही।
सबसे गंभीर सवाल गिरफ्तार आरोपी मोना से जुड़ी संपत्तियों को लेकर उठाया गया है। पीड़ितों का दावा है कि उसके बैंक विवरण में कार खरीदने, मकान ऋण निपटाने और आभूषण खरीदने के लेन-देन सामने आए, लेकिन इन संपत्तियों की जब्ती नहीं की गई।
एक पीड़ित ने मनमीत और गुरबेज सिंह के बीच बातचीत की कथित रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपने का दावा किया है। आरोप है कि बातचीत में पुलिस कार्रवाई से बचने के तरीके बताए जा रहे हैं।
अब पीड़ितों ने पुलिस आयुक्त से निष्पक्ष जांच, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, संदिग्ध संपत्तियों की जब्ती और मनमीत सिंह होरा की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
सवाल सीधा है—जब शिकायतकर्ताओं के मुताबिक साक्ष्य पुलिस के पास हैं, तो मनमीत अब तक आरोपी क्यों नहीं? और जिन चार लोगों को पुलिस तलाश रही है, उनकी गिरफ्तारी आखिर कब होगी?

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