इंदौर। राजनीति में नेताओं के बयान कई बार उनके साथ लंबे समय तक चलते हैं। मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ भी ऐसा ही कुछ होता दिख रहा है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल संकट के दौरान उनके मुंह से निकला ‘घंटा’ शब्द अब एक बार फिर राजनीतिक तंज का हथियार बन गया है।
राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर विजयवर्गीय ने कहा कि राहुल गांधी के आने से भाजपा को फायदा होगा। उनके इस बयान पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने शनिवार को इंदौर प्रेस क्लब में पलटवार करते हुए कहा—“घंटा फायदा होगा।”
कांग्रेस ने इस बयान को सीधे भागीरथपुरा प्रकरण से जोड़ दिया। दिसंबर 2025 में दूषित पानी के संकट के दौरान पत्रकारों ने विजयवर्गीय से पीड़ितों के इलाज, मुआवजे और साफ पानी की व्यवस्था को लेकर सवाल किए थे। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर नाराजगी में ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल किया था। बाद में उनके इस बयान को लेकर विपक्ष ने जमकर हमला बोला और विजयवर्गीय को सफाई देनी पड़ी थी।
भागीरथपुरा प्रकरण में विवाद केवल बयान तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। बाद की जांच में पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर भी सवाल उठे हैं।
अब राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम पर सियासी बयानबाजी के बीच वही पुराना शब्द फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। कांग्रेस इसे विजयवर्गीय की पुरानी टिप्पणी का जवाब बता रही है, जबकि भाजपा के लिए सवाल यह है कि एक राजनीतिक बयान कब तक बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक बोझ बना रहता है?

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