अनाज जांच मशीनों के टेंडर में पुराने दस्तावेजों पर उठे सवाल
भोपाल। किसानों से खरीदे जाने वाले अनाज की गुणवत्ता जांचने के लिए मध्यप्रदेश में एआई आधारित फूड ग्रेन एनालाइजर किराये पर लेने की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल टेंडर की उस पात्रता शर्त को लेकर है, जिसमें संबंधित कंपनियों से एआई आधारित मशीनों के संचालन और अनुभव का लंबा रिकॉर्ड मांगा गया है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि कथित तौर पर कुछ कंपनियों ने अपने अनुभव को साबित करने के लिए वर्ष 2014 और 2020 के पुराने उपकरणों से जुड़े दस्तावेज लगाए हैं। अब सवाल यह है कि जिन मशीनों के दस्तावेज कई वर्ष पुराने हैं, क्या वे वास्तव में उसी एआई तकनीक पर आधारित थीं, जिसका इस्तेमाल वर्तमान निविदा में प्रस्तावित है?
सरकारी रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश में स्वचालित फूड ग्रेन एनालाइजर से जुड़ी निविदाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। मार्च 2026 में कृषि उपज मंडियों में खाद्यान्न गुणवत्ता जांच के लिए दो-दिशीय स्वचालित फूड ग्रेन एनालाइजर की लगभग 18.48 करोड़ रुपये की निविदा दर्ज है। वहीं एआई आधारित स्वचालित ग्रेन एनालाइजर के लिए केंद्र स्तर पर भी 2024 में निविदा दस्तावेज उपलब्ध हैं।
ऐसे में असली जांच यह होनी चाहिए कि टेंडर में मांगा गया ‘पांच साल का एआई अनुभव’ आखिर किस तकनीकी परिभाषा के आधार पर तय किया गया?
क्या पुराने उपकरणों में वास्तव में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण प्रणाली थी? क्या उन मशीनों का स्रोत कोड, तकनीकी प्रमाणपत्र, स्थापना रिकॉर्ड और वास्तविक उपयोग का प्रमाण उपलब्ध है? और क्या सभी कंपनियों के अनुभव दस्तावेजों की स्वतंत्र तकनीकी जांच हुई?
यदि इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं तो मामला केवल मशीन किराये पर लेने का नहीं, बल्कि टेंडर की पात्रता शर्तों और प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता का भी बन जाता है।
अब निगाह इस बात पर है कि मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम इन दस्तावेजों की तकनीकी जांच सार्वजनिक करता है या नहीं।
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