नई दिल्ली। सत्य निकेतन में इमारत ढहने से सात लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने एक और गिरफ्तारी की है। पुलिस ने पीजी संचालक सुधांशु को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मामले में श्रमिक ठेकेदार और मकान मालिक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
हादसे के बाद अब जांच का दायरा केवल इमारत के मालिक तक सीमित नहीं रह गया है। पीजी संचालन, निर्माण और भवन की सुरक्षा से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। पुलिस दूसरे पीजी संचालक की तलाश कर रही है, जो घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।
सत्य निकेतन जैसे इलाके में बड़ी संख्या में छात्र और किरायेदार पीजी में रहते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत में इतने लोग रह रहे थे, उसकी संरचनात्मक सुरक्षा और निर्माण संबंधी नियमों की निगरानी आखिर किस स्तर पर हुई?
गिरफ्तारियां होने के बावजूद जांच की असली कसौटी अब यह होगी कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के साथ-साथ उन अधिकारियों और संस्थाओं की भूमिका भी तय होती है या नहीं, जिनकी जिम्मेदारी भवन सुरक्षा और नियमों के पालन की निगरानी करना है।
सात लोगों की मौत को केवल गिरफ्तारियों और मुकदमे तक सीमित करने के बजाय यह भी सामने आना चाहिए कि खतरनाक भवन में लोगों को रहने की अनुमति कैसे मिली और समय रहते खतरे की पहचान क्यों नहीं हुई।
सवाल गिरफ्तारी से आगे का है—क्या इस हादसे में पूरी जवाबदेही तय होगी?

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