सोने में निवेश करने वालों के सामने आमतौर पर तीन विकल्प होते हैं—फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी)। तीनों में सोने की कीमत बढ़ने का फायदा मिल सकता है, लेकिन खर्च, कर, ब्याज और पैसा निकालने की सुविधा अलग-अलग होती है।
फिजिकल गोल्ड
गहने, सिक्के या बार के रूप में सोना खरीदना उन लोगों के लिए बेहतर हो सकता है जिन्हें वास्तविक सोना अपने पास रखना है। लेकिन गहनों में मेकिंग चार्ज और अन्य लागत रिटर्न को प्रभावित कर सकती है। चोरी और सुरक्षित रखने की चिंता भी रहती है।
गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड ईटीएफ के जरिए बिना घर पर सोना रखे सोने की कीमत में निवेश किया जा सकता है। इसे शेयर बाजार के माध्यम से खरीदा-बेचा जाता है। इसमें भंडारण की परेशानी नहीं होती, लेकिन दलाली और फंड से जुड़े खर्च को ध्यान में रखना चाहिए।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
एसजीबी सोने की कीमत से जुड़े सरकारी प्रतिभूति हैं। इनमें सोने की कीमत बढ़ने का लाभ मिलने के साथ 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलता है। सामान्यतः इनकी अवधि आठ वर्ष होती है और पांचवें वर्ष के बाद निर्धारित तिथियों पर समय से पहले निकासी की सुविधा रहती है।
कर व्यवस्था में भी अंतर महत्वपूर्ण है। खासकर 2026 में एसजीबी के कर नियमों में बदलाव हुआ है—मूल निर्गम में खरीदे गए और परिपक्वता तक रखे गए एसजीबी पर मिलने वाली पूंजीगत लाभ छूट और द्वितीयक बाजार से खरीदे गए एसजीबी के कर उपचार को अलग-अलग समझना जरूरी है।
तो किसे चुनें?
सिर्फ निवेश के नजरिए से देखें तो गोल्ड ईटीएफ आसान खरीद-बिक्री और पारदर्शिता के कारण सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। ब्याज और लंबी अवधि का लक्ष्य हो तो पात्र एसजीबी आकर्षक हो सकता है। वहीं गहने पहनने या भौतिक सोना रखने की जरूरत हो तो फिजिकल गोल्ड का उद्देश्य अलग है।
**निवेश से पहले कर नियम, शुल्क, जोखिम और आपकी समय-सीमा जरूर देखें।**

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