ओला, उबर और ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाले कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार योगदान का नया तरीका तय करने पर विचार कर रही है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत ऐसे मंचों से जुड़े कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रावधान है। इसमें जीवन और दिव्यांगता सुरक्षा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य, मातृत्व तथा वृद्धावस्था जैसी सुविधाओं को शामिल किया जा सकता है।
सबसे अहम सवाल यह है कि कंपनियां इस कोष में कितना और किस आधार पर पैसा जमा करेंगी। मौजूदा कानून में एग्रीगेटर के सालाना कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत योगदान निर्धारित करने का प्रावधान है, लेकिन यह राशि कामगारों को दिए जाने वाले भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
अब श्रम मंत्रालय योगदान की गणना को अधिक स्पष्ट करने के लिए हर लेनदेन या कामगारों को किए गए भुगतान के आधार पर योगदान तय करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव का असर ओला-उबर जैसी अधिक लेनदेन वाली कंपनियों और कम राशि वाले प्रत्येक लेनदेन वाले कारोबार पर अलग-अलग पड़ सकता है।
नियम लागू होने पर बड़ी संख्या में वाहन चालक, भोजन पहुंचाने वाले कर्मचारी और अन्य मंच आधारित कामगार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि अंतिम योगदान सूत्र और विस्तृत नियम अभी तय होना बाकी हैं, इसलिए इसे अभी प्रस्तावित व्यवस्था के तौर पर ही देखना चाहिए।

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