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डॉक्टरों पर हाथ उठाया तो खुली छूट नहीं—सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश

 


महाराष्ट्र में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर लगातार हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेहद सख्त रुख अपनाया। अदालत ने साफ कहा कि चिकित्सकों पर हमला करने वाले लोग खुले में घूमने के हकदार नहीं हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यहां तक कहा कि ऐसे आरोपियों को तत्काल हिरासत में लिए जाने पर विचार होना चाहिए और डॉक्टरों पर हमला करने वालों के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती। 



मामला कल्याण के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों से कथित मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश सुख्र्या म्हात्रे से जुड़ा है। आरोप है कि जुलाई में अस्पताल में विवाद के बाद महिला डॉक्टर समेत तीन डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई थी। म्हात्रे ने अपनी जमानत से जुड़ी शर्तों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सुनवाई के दौरान उनकी ओर से याचिका वापस ले ली गई। महाराष्ट्र सरकार ने भी उनकी जमानत रद्द करने की मांग का रुख अपनाया है। 


इसी बीच पालघर में भी अस्पताल कर्मचारियों से कथित मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन शंखे और शहर प्रमुख राहुल घरात समेत 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप उपचार और बिल को लेकर हुए विवाद के बाद मारपीट का है। 


सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है—राजनीतिक रसूख डॉक्टरों पर हाथ उठाने का लाइसेंस नहीं हो सकता। अस्पताल इलाज की जगह है, दबंगई दिखाने की नहीं।

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