नई दिल्ली। डेरिवेटिव कारोबार में एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट कीमत तय करने के मौजूदा तरीके की अब बाजार नियामक सेबी समीक्षा करने जा रहा है। यह फैसला नए क्लोजिंग ऑक्शन सत्र लागू होने के बाद बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिक्रियाओं और एक्सपायरी के दौरान कीमतों में बढ़ी अस्थिरता को देखते हुए लिया गया है। सेबी के मुताबिक प्रस्तावित बदलावों पर करीब एक सप्ताह में सलाह-मशविरा पत्र जारी किया जा सकता है।
दरअसल, 3 अगस्त 2026 से शेयर बाजार के नकद कारोबार में क्लोजिंग ऑक्शन सत्र लागू किया गया है। इसके तहत नीलामी से तय होने वाली बंद कीमत ही एक्सपायरी पर डेरिवेटिव अनुबंधों की सेटलमेंट कीमत का आधार बनती है।
इसके बाद बाजार के कई कारोबारियों और दलालों ने चिंता जताई कि दिन के अंतिम हिस्से में सीमित अवधि की नीलामी से बनने वाली कीमत में अचानक उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसका सीधा असर वायदा एवं विकल्प कारोबार की एक्सपायरी पर होने वाले भुगतान और जोखिम प्रबंधन पर पड़ सकता है।
3 सितंबर को सेबी ने कहा कि उसने क्लोजिंग ऑक्शन सत्र के शुरुआती एक महीने के संचालन और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों की समीक्षा की है। अब नियामक सेटलमेंट कीमत तय करने की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित कर सकता है। हालांकि, क्लोजिंग ऑक्शन सत्र को वापस लेने का कोई संकेत नहीं दिया गया है। अंतिम फैसला सलाह-मशविरा पत्र और हितधारकों की प्रतिक्रियाओं के बाद होगा।
**यानी एक्सपायरी के दिन कीमत तय करने का मौजूदा खेल बदल सकता है—अब नजर सेबी के अगले कदम पर है।**

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